वाराणसी, दुनिया भर में यह जनश्रुति काफी चर्चित रही है कि राजनेता बनना है तो जेएनयू में जाओ, ब्यूरोक्रेसी में आना है तो इलाहाबाद विश्वविद्यालय, मगर कुलपति का पद चाहिए तो एक बार बीएचयू में जाइए। बाकी विश्वविद्यालयों ने भले ही अपनी इन पहचान को खो दिया हो, मगर स्पष्ट कर दे बीएचयू आज भी कुलपतियों की नर्सरी बना हुआ है। पंडित मदन मोहन मालवीय द्वारा स्थापित बीएचयू में कई बरस से छात्रों आगे चलकर कुलपति बनते ही हैं। सेंट्रल लाइब्रेरी के डिप्टी लाइब्रेरियन डा. संजीव सर्राफ ने बताया कि जहां तक मालूम हैं वर्तमान में बीएचयू के दर्जन भर से ज्यादा कुलपति देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में कुलपति के पद पर विराजमान हैं।
इसमें राची टेक्निकल यूनिविर्सिटी के प्रो. पी के मिश्रा, लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रो. आलोक राय, लखनऊ के ही भीमराव अंबेडकर सेंट्रल विश्वविद्यालय के प्रो. संजय कुमार सिंह, सेंट्रल यूनिवर्सिटी, गुजरात के प्रो. आर एस दुबे, दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रो. एचसीएस राठौर गया, पंजाब विश्वविद्यालय के प्रो. राजकुमार, सोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रो. गोपबंधु, पाटलिपुत्र विवि के प्रो. जी सी जायसवाल, त्रिपुरा विवि के प्रो. जी पी परसाई, संपूर्णानंद विवि के प्रो. राजाराम शुक्ला, काशी विद्यापीठ के प्रो. टी एन सिंह और अरुणाचल विश्वविद्यालय के प्रो. राकेश कुशवाहा आदि प्रमुख हैं।
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