मुंबई । महाराष्ट्र की सियासत में ‘किंगमेकर’ की तरह उभरे धनंजय मुंडे को नितिन गडकरी का भी करीबी माना जाता है और वह गडकरी के बीजेपी अध्यक्ष बनने के बाद महाराष्ट्र में बीजेपी युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बने थे।
भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चा से राजनीतिक करियर की शुरुआत करने वाले धनंजय को महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र के प्रमुख नेताओं में से एक माना जाता है।सीएम देवेंद्र फडणवीस के शपथ लेने के बाद से ही महाराष्ट्र की सत्ता में कुछ नाम बेहद अहम कहे जाने लगे।
इनमें सबसे बड़ा नाम था दिवंगत बीजेपी नेता गोपीनाथ मुंडे के भतीजे धनंजय मुंडे का। गोपीनाथ मुंडे की बेटी पंकजा को इस बार के विधानसभा चुनाव में पराजित करने वाले धनंजय ने इस बार देवेंद्र फडणवीस और राष्ट्रवादी कांग्रेस के गठबंधन में एक प्रमुख भूमिका अदा की। माना जा रहा है कि बीजेपी और एनसीपी के बीच हुए फैसले के पहले धनंजय ने तमाम विधायकों से संवाद भी किया और सभी को अजीत पवार के साथ बीजेपी की सरकार में शामिल होने के लिए मनाने में सक्रियता से काम किया।
दिन भर चले राजनीतिक घटनाक्रम के बीच धनंजय मुंडे के नाम पर चर्चा होती रही और देर शाम एनसीपी ने जब मुंबई के वाईवी चव्हाण सेंटर में पार्टी की बैठक बुलाई तो धनंजय इस बैठक में भी पहुंच गए। कहा जा रहा था कि धनंजय शनिवार सुबह शपथ ग्रहण के वक्त से ही अजीत पवार के साथ मौजूद थे और शाम को वह शरद पवार के बुलाने पर एनसीपी विधायक दल की बैठक में पहुंचे।
पवार से पहले एनसीपी के दो अन्य विधायक भी पार्टी नेता शरद पवार के साथ बैठक में पहुंचे थे। ये विधायक उस बागी गुट का हिस्सा थे, जिन्हें एक विशेष विमान से दिल्ली ले जाया जा रहा था। एनसीपी की इसी बैठक में शरद पवार ने अजीत पवार को पार्टी के विधायक दल नेता पद से हटाते हुए जयंत पाटिल को नया सीएलपी बनाया।
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