आइआइटी कानपुर मच्छर इंसान को कैसे शिकार बनाते हैं और इन्हें किससे डर लगता है, ये जानने के लिए आइआइटी कानपुर के विशेषज्ञ उनका दिमाग पढ़ रहे हैं। केंद्र सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी के सहयोग से चल रहे शोध के आधार पर मच्छर रिपेलेंट, क्वाइल और मैट्स को ताकतवर बनाने की तैयारी है ताकि मच्छरों का हमला रोककर डेंगू-चिकनगुनिया का खात्मा किया जा सके। इस तकनीक को पेटेंट कराया जाएगा।

बायोलॉजिकल साइंस एंड बायोइंजीनियरिंग के प्रो. नितिन गुप्ता और शोधार्थियों ने मच्छरों पर कई तरह के प्रयोग किए, जिससे उनके दिमाग में न्यूरॉन्स के एक्टिव होने और न होने का पता चला। उनके मुताबिक मच्छरों के दिमाग में न्यूरॉन्स की संख्या मनुष्य के मुकाबले बेहद कम है, लेकिन उनके सूंघने का सर्किट इंसानों के सर्किट की तरह ही संयोजित है। शोधार्थी आरुष मित्तल ने कंप्यूटर सिमुलेशन के जरिए ये पता लगाया कि भले ही हर मच्छन का सर्किट बाकी मच्छरों से थोड़ा अलग हो लेकिन उनका बर्ताव एक ही तरह का होता है। उन्होंने शोध को नेचर कम्युनिकेशंस जर्नल में प्रकाशित कराया है।
तेजी से एक्टिव होते हैं न्यूरॉन्स
प्रो. गुप्ता के मुताबिक मनुष्य के दिमाग में करीब 10 हजार करोड़ न्यूरॉन्स होते हैं, जबकि एक मच्छर में न्यूरॉन्स की संख्या करीब एक लाख रहती है। किसी खास तरह की खुशबू या सिग्नल से यह एक्टिव हो जाते हैं। सबसे खास बात तो यह है अलग अलग सर्किट डायग्राम के बावजूद इनका बर्ताव एक जैसा ही रहता है। आपस में संवाद करने लगते हैं।
क्या हैं न्यूरॉन्स
न्यूरॉन्स दिमाग की एक कोशिका होता है, जो कि चुंबकीय प्रक्रिया से संदेश आगे भेजने का काम करती है। आवाज, रोशनी, किसी भी वस्तु के छूने की स्थिति में सक्रिय होकर दिमाग के अंदर तुरंत संदेश भेजते हैं।
- कई केमिकल ऐसे हैं जो मच्छरों को दूर भगाने में सक्षम हैं। ये केमिकल किस तरह काम करें, इस पर भी शोध चल रहा है। इस तकनीक को पेटेंट भी कराया जाएगा। -नितिन गुप्ता, प्रोफेसर, बायोलॉजिकल साइंस एंड बायोइंजीनियरिंग विभाग, आइआइटी कानपुर
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