नई दिल्ली। भारत ने पिछले साल अगस्त में जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाकर उसका विशेष दर्जा खत्म कर दिया था। इसके बाद से ही पाकिस्तान बौखलाया हुआ है और वह लगातार अन्य देशों का सहयोग हासिल करने की कोशिश में जुटा हुआ है। इस बीच, स्विट्जरलैंड के दावोस में वल्र्ड इकोनॉमिक फोरम (ईडब्ल्यूएफ) के इतर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात हुई।
इस दौरान ट्रंप ने एक बार फिर पाकिस्तान को कश्मीर मुद्दे पर मदद की पेशकश दोहराई। हालांकि यह बात भारत को रास नहीं आई। गुरुवार को विदेश मंत्रालय की तरफ से कहा गया कि कश्मीर मामले पर किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं होगी। प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि दावोस में पाकिस्तान के पीएम ने काफी चीजें कहीं हैं।
काफी महीनों से इसी लहजे में बात कर रहे हैं। ये विरोधाभासी है। तथ्यात्मक गलतियां भी हैं। दर्शाता है कैसे इमरान खान हताश हो रहे हैं। लग रहा है बिल्कुल निराशा की भावना की तरफ जा रहे हैं। पाकिस्तान को यह समझना होगा कि दुनिया ने उनके डबल स्टैंडर्ड को समझ लिया है। एक तरफ आतंकवाद को मानते नहीं है, दूसरी तरफ ऐसे संगठनों को पनाह देते हैं जो भारत और दूसरे देशों में आतंकवाद फैलाते हैं।
कश्मीर मुद्दे व उसकी मध्यस्थता को लेकर हमारा स्टैंड पूरी तरह साफ है। मैं एक बार फिर कहना चाहता हूं कि इस मामले में तीसरे पक्ष की जरूरत नहीं है। अगर भारत और पाकिस्तान में कोई द्विपक्षीय मुद्दे हैं, जिन पर चर्चा करने की जरूरत है, तो इसे शिमला समझौते और लाहौर घोषणा के प्रावधानों के तहत दो देशों के बीच किया जाना चाहिए।
दोनों देश अपने बीच के मुद्दे कैसे सुलझा सकते हैं, इस सवाल के जवाब में रवीश कुमार ने कहा कि गेंद पाकिस्तान के पाले में है। उसे आतंकवाद खत्म करना होगा और शांति का माहौल बनाना होगा। रवीश ने यह भी कहा कि शांति बहाली हो तो दोनों देश द्विपक्षीय तौर पर अपने मुद्दे निपटा सकते हैं। उल्लेखनीय है कि आर्टिकल 370 खत्म किए जाने के बाद ट्रंप ने चौथी बार कश्मीर पर मदद का प्रस्ताव दिया है।
Leave a Reply