नई दिल्ली । चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शुक्रवार को दो दिन की भारत यात्रा पर पहुंचेंगे। 11-12 अक्तूबर को चेन्नई के मामल्लापुरम में इस शिखर वार्ता का आयोजन होगा। नरेंद्र मोदी के दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद चीनी राष्ट्रपति की ये पहली भारत यात्रा होगी।
हालांकि, दो दिन के इस दौरे में भारत-चीन के बीच कोई बड़ा करार होने की संभावना नहीं है। क्योंकि ये एक तरह की इन्फॉर्मल विजिट है जिसमें कोई निश्चित एजेंडे पर बात नहीं होगी।
भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच मंत्रालय ने कहा कि ये शिखर वार्ता दोनों नेताओं को द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक महत्व के मुद्दों पर व्यापक बातचीत जारी रखने का अवसर प्रदान करेगी।
अनौपचारिक शिखर वार्ता अमूमन, वार्षिक शिखर सम्मेलन, जी-20, ब्रिक्स वार्ता जैसे दूसरे औपचारिक शिखर सम्मेलन की पृष्ठभूमि तैयार करती है। अनौपचारिक वार्ता में देशों के बीच आपसी विचारों के प्रत्यक्ष, स्वतंत्र और स्पष्ट आदान-प्रदान की अनुमति होती ।
खासकर उन मुद्दों पर जिसके बारे में औपचारिक द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकों के माध्यम से बातचीत करना संभव नहीं हो पाता है। अनौपचारिक शिखर वार्ता के आयोजन के लिए कोई निश्चित अवधि निर्धारित नहीं होता है।
जैसा कि औपचारिक शिखर वार्ता के लिए होता है, वार्षिक या द्विवार्षिक. आवश्यकता पड़ने पर तात्कालिक तौर पर संबंधित देशों द्वारा इनका अायोजन किया जाता है।
चूंकि, अनौपचारिक शिखर वार्ता में व्यापक मुद्दों पर चर्चा की अनुमति होती है, ऐसे में इसमें कोई विशिष्ट उद्देश्य निहित नहीं होता है. ऐसा भी माना जाता है कि कभी-कभी यह वार्ता औपचारिक आदान-प्रदान की तुलना में राजनयिक बातचीत के दौरान अपेक्षाकृत बड़ी भूमिका का निर्वाह कर जाता है। ऐसा मानने का कारण इस वार्ता में होनेवाली चर्चा का अपेक्षाकृत गंभीर और लचीला होना है।
नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी-जिनपिंग के बीच पहली अनौपचारिक शिखर वार्ता 27-28 अप्रैल, 2018 को वुहान में आयोजित की गयी थी। इस आयोजन का मकसद द्विपक्षीय और वैश्विक महत्व के मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करना था। साथ ही, वर्तमान और अंतरराष्ट्रीय स्थितियों के संदर्भ में राष्ट्रीय विकास के लिए दृष्टिकोण और प्राथमिकताओं को विस्तृत करने का मुद्दा भी शामिल था।
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