नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अभी हाल में अपने दूसरे कार्यकाल का पहला साल पूरा किया है। ऐसे में इस अवसर पर उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए अपने वादों को दोहराया और कहा कि उनकी सरकार एक मजबूत, ताकतवर व भ्रष्टाचार मुक्त भारत के लिए प्रतिबद्ध है।
इस संबंध में उनके आधिकारिक ट्विटर हैंडल से नरेंद्र मोदी की वेबसाइट पर छपा एक आर्टिकल भी शेयर किया गया। इस लेख में भी सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ़ छिड़ी जंग के बारे में चर्चा की गई। जिसमें बताया गया कि कैसे डिजिटल इंडिया के प्रयोग से देश को करप्शन फ्री करने का प्रयास किया गया। नई तकनीकें लाई गईं ताकि बिचौलिए की भूमिका खत्म हो जाए।
हालाँकि, इस लेख में एक जगह कुछ दिलचस्प लाइन भी दिखीं। जहाँ उन लोगों की ओर इशारा किया गया था, जिन्हें एक समय तक इतना ताकतवर माना जाता था कि वे कानून के दायरे से बाहर समझे जाते थे। लेकिन आज उन्हें कानून से बचा पाना असंभव लग रहा है।
Modi 1.0 was known for historic steps in its fight against corruption and institutionalising honesty and transparency.
How has one year of Modi 2.0 managed to sustain the momentum in #EliminatingCorruption?
Read here. https://t.co/9aIOUUOF8Q
— narendramodi_in (@narendramodi_in) June 3, 2020
अब यदि विचार करें कि आखिर वो कौन से ताकतवर लोग थे, जिन्हें वाकई एक समय तक कानून की पहुँच के बाहर समझा जाता था, तो सबसे पहले पी चिंदबरम और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम का नाम याद आएगा। जिनके ख़िलाफ़ हाल में ईडी ने स्पेशल सीबीआई जज अजय कुमार की अदालत में चार्जशीट फाइल की है।
इस चार्जशीट में चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति को कई कंपनियों का लाभकारी मालिक बताया गया है। जिनके ताल्लुक देश और विदेश दोनों जगहों से हैं।
इसके अलावा दोनों पिता-पुत्र को चिंदबरम के वित्त मंत्री रहते हुए आईएनएक्स मीडिया को दी गई FIPB स्वीकृति के संबंध में वित्तीय गड़बड़ी और उल्लंघनों के आरोपों का भी सामना करना पड़ रहा है।
गौरतलब रहे कि पूर्व वित्तीय मंत्री पी चिदंबरम के सवालों के घेरे में आने के बाद भी उन्हें कानून की पहुँच से बाहर माना जाता था। लेकिन पिछले साल न केवल सीबीआई ने उन्हें गिरफ्तार किया, बल्कि 106 दिन की पुलिस कस्टडी में भी बेल मिलने तक रखा।
यहाँ बता दें कि पी चिदंबरम आईएनएक्स मीडिया घोटाले में आरोपित हैं, जिसमें आईएनएक्स मीडिया को 300 करोड़ रुपए से अधिक का विदेशी निवेश देने में रिश्वतखोरी और लॉबिंग के आरोप शामिल हैं।
UPA कार्यकाल में भ्रष्टाचार करने वाले लोगों पर कार्रवाई मोदी सरकार के पहले कार्यकाल की खूबी रही। रक्षा सौदे में शामिल कई प्रमुख लोगों के प्रत्यर्पण के साथ भ्रष्टाचार और उनके अंतरराष्ट्रीय लिंक का खुलासा हुआ।
संजय भंडारी पर साल 2010 से ही कई आरोपों में जाँच चल रही थी। लेकिन साल 2016 में आयकर विभाग ने कर की चोरी के मामलों में जाँच के लिए उसकी कंपनियों में रेड मारी। और इस छापेमारी में उसके पास से गोपनीय रक्षा मंत्रालय के दस्तावेज पाए गए थे, जिसमें मिड-एयर के रिफ्यूएलर्स खरीदने के भारत के प्रस्ताव संबंधित दस्तावेज शामिल थे।
अब, इसी संजय भंडारी के ख़िलाफ़ भी, सोमवार को चार्ज शीट फाइल हुई है। जिसमें कथित तौर पर यह बताया गया है कि हथियार डीलर ने अपने अपराधों में कैसे अपराधों को अंजाम दिया। इसके अलावा ईडी ने भंडारी के ख़िलाफ़ गैर जमानती वारंट भी माँगा है ताकि वह प्रत्यर्पण अनुरोध दायर कर सकें। बता दें कि भंडारी के ख़िलाफ़ इससे पहले इंटरपोल रेड नोटिस जारी हो चुकी है।
इसी के साथ आपको ध्यान दिला दें कि भंडारी के संबंध सोनिया गाँधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा से भी हैं। भंडारी पर आरोप है कि उसने वाड्रा को लंदन में जमीन दिलाने में मदद की थी। साथ ही पिलाटस के बेसिक ट्रेनर विमान के लिए 2,895 करोड़ रुपए के सौदे के लिए भंडारी के ख़िलाफ़ सीबीआई द्वारा भी जाँच की जा रही है।
इनके अतिरिक्त मोदी सरकार के कार्यकाल में उन अधिकारियों के ख़िलाफ़ भी सख्ती से कार्रवाई हुई, जिन पर कभी भ्रष्टाचार आदि का आरोप था।याद हो अगर तो पिछले साल इन खबरों ने खूब सुर्खियाँ बटोरी थी कि सरकार ने कई अक्षम अधिकारियों को जबरदस्ती रिटायर कर दिया था। साथ ही उन लोगों की नौकरी भी ले ली थी, जिन पर घूस लेने के आरोप थे।
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