भारत में एक शीर्ष एक्सचेंज फर्म से करीब 20 करोड़ रुपए कीमत के करीब 438 बिटकॉइन चोरी होने का मामला सामने आया है। इसे क्रिप्टोकरेंसी की अब तक की सबसे बड़ी चोरी का मामला सामने माना जा रहा है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए यह जानकारी सामने आई है। कॉइनसिक्योर जो कि दिल्ली का एक बड़ा क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज है ने साइबर सेल में एफआईआर दर्ज कराई है। इस एफआईआर में उसने अपने सीएसओ अमिताभ सक्सेना पर आरोप लगाया है कि उन्होंने फर्म के वॉलेट से गलत तरीके से पैसों को निकासी की है। इस एक्सचेंज ने सरकार से अपील की है कि अमिताभ सक्सेना का पासपोर्ट जब्त कर लिया जाए और क्योंकि उन्हें डर है कि कहीं वो देश छोड़कर भाग न जाएं। यह मामला आईपीसी सेक्शन और आईटी एक्ट की धारा 66 के अंतर्गत दर्ज किया गया है।
कैसे हुआ खुलासा: आपको बता दें कि कॉइनसिक्योर के देशभर में 2 लाख यूजर्स हैं। एक्सचेंज ने पाया कि वो सभी बिटकॉइन जिन्हें ऑफलाइन स्टोर किया गया था वो सभी गायब हो गए हैं। बाद में जानकारी में यह बात सामने आई है कि प्राइवेट की- यानी कि पासवर्ड को कि कंपनी के पास और ऑफलाइन स्टोर किया जाता है वो ऑनलाइन हैक हो गया जिसने हैक को अंजाम दे दिया। कंपनी ने हैकर्स का पता लगाने की भरसक कोशिश की लेकिन सभी प्रभावित वॉलेट से डेटा को डिलीट किया जा चुका था और हैकर्स ने ऐसा कोई सुराग नहीं छोड़ा जिससे मालूम किया जा सके कि बिटकॉइन को कहां ट्रांसफर किया गया। गौरतलब है कि बिटकॉइन ने साल 2017 के दिसंबर महीने में 19,000 का स्तर छू लिया था, बिटकॉइन के चलते काफी सारे लोगों ने खूब कमाई की, इसमें बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन भी शामिल थे। हालांकि साल 2018 में इसमें तेज गिरावट आई और ये फिलहाल 7,820 डॉलर पर कारोबार कर रहा है। हैकर्स ने एक प्रमुख बिटकॉइन एक्सचेंज फर्म को 20 करोड़ का चूना लगाया है। फर्म के ज्यादातर वॉलिट्स हैक हो गए थे। कुल मिलाकर 440 बिटकॉइन्स की चोरी हुई है। इसे क्रिप्टोकरंसी की चोरी की सबसे बड़ी वारदात कहा जा रहा है। दिल्ली पुलिस के साइबर सेल के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस चोरी की पुष्टि करते हुए कहा है कि कॉइनसिक्यॉर नाम की क्रिप्टोकरंसी फर्म ने उन्हें इस चोरी के बारे में बताया। इस संदर्भ में आईपीसी कि विभिन्न धाराओं के साथ-साथ आईटी ऐक्ट की धारा 66 के तहत केस दर्ज कर लिया गया है।
कॉइनसिक्यॉर के देशभर में 2 लाख से ज्यादा यूजर्स हैं। कंपनी ने पुलिस को बताया कि उन्हें इस चोरी के बारे में सोमवार को उस वक्त पता चला जब सभी वॉलिट्स को चेक किया जा रहा है। कंपनी के एक सीनियर सिक्यॉरिटी ऑफिसर को पता चला कि जिन बिटकॉइन्स को ऑफलाइन स्टोर करके रखा गया था, वे सभी गायब हो चुके हैं। बाद में पता चला कि वॉलिट्स के प्राइवेट कीज यानी पासवर्ड्स- जिन्हें ऑफलाइन स्टोर करके रखा गया था, ऑनलाइन लीक हो चुके थे, जिस वजह से हैकिंग हुई। बिटकॉइन धमाल मचा रहा है। बिटकॉइन के बेतहाशा बढ़ने से लोग अन्य क्रिप्टोकरंसीज के प्रति भी आकर्षित हो रहे हैं। यही वजह है कि इथेरियम, लाइटकॉइन, रिपल जैसी डिजिटल करंसीज लगातार चढ़ रही हैं।
इन 7 करंसीज की इथेरियम बिटकॉइन की सबसे नजदीकी प्रतिस्पर्धी के रूप में उभर रहा है। 2014 में आया इथेरियम अभी दूसरी सबसे मूल्यवान करंसी है। बिटकॉइन की तरह यह भी एक तरह का ब्लॉकचेन नेटवर्क ही है। बिटकॉइन और इथेरियम में मुख्य अंतर मकसद और क्षमता का है। बिटकॉइन ब्लॉकचेन के इस्तेमाल का मकसद यह जानने के लिए होता है कि बिटकॉइन किन-किनके पास है जबकि इथेरियम ब्लॉकचेन के जरिए डीसेंट्रलाइज्ड ऐप्लिकेशंस बनाए जाते हैं। कई इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स की नजर में रिपल बिटकॉइन का उत्तराधिकारी है। 2012 में बिटकॉइन के पूर्व डिवेलपरों ने रिपल लॉन्च की थी। यह एक स्टार्टअप है जिसकी वेबसाइट कहती है कि रिपल एक ब्लॉकचेन टेक्नॉलजी है जो बैंकों, पेमेंट प्रवाइडरों, डिजिटल ऐसेट एक्सचेंजों और कंपनियों को जोड़ती है। यह स्टार्टअप रिपल के नाम से पेमेंट नेटवर्क भी ऑपरेट करता है। रिपल की क्रिप्टोकरंसी XRP है। पिछले साल दिसंबर 2012 तक लाइटकॉइन की कीमत 5,700 प्रतिशत बढ़ चुकी थी जबकि उस अवधि तक बिटकॉइन 1,550 प्रतिशत ही मजबूत हुआ था।
यह पियर-टु-पियर क्रिप्टोकरंसी है जिसे गूगल के पूर्व एंप्लॉयी और कॉइनबेस में इंजिनियरिंग के पूर्व डायरेक्टर चार्ली ली ने बनाया था। टेक्निकल इंप्लेमेंटेशन के लिहाज से लाइटकॉइन बिटकॉइन से बहुत मिलता-जुलता है। दावा किया जा रहा है कि जेडकैस (ZEC) पहली परमिशनलेस क्रिप्टोकरंसी है जो ट्रांजैक्शन को पूरी तरह सुरक्षित रखती है। बिटकॉइन की तरह ही Zcash भी ब्लॉकचेन आधारित करंसी है। अक्टूबर 2016 में लॉन्च हुई यह डिजिटल करंसी का मॉनेटरी बेस भी बिटकॉइन के बराबर है। डैश बिटकॉइन का एक और कड़ा प्रतिस्पर्धी है। यह एक ओपन सोर्स पियर-टु-पियर क्रिप्टोकरंसी है। डैश का इस्तेमाल त्वरित, ऑनलाइन या इन-स्टोर प्राइवेट पेमेंट्स के लिए किया जाता है। इसके लिए दुनियाभर के हजारों यूजर्स सिक्यॉर ओपन-सोर्स प्लैटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं।
मोनेरो के बारे में कहा जाता है कि यह एक सुरक्षित, निजी और अज्ञात क्रिप्टोकरंसी है। इसकी लॉन्चिंग अप्रैल 2014 में हुई। मोनरो के डिवेलपर्स नेटवर्क की ट्रांजैक्शन फी 80 प्रतिशत तक कम करने का प्रयास कर रहे हैं। आईओटीए भी बड़ी तेजी से बढ़ रहा है। इसका मार्केट कैप 0.75 लाख करोड़ रुपये के आसपास है। बिटकॉइन के डिवेलपमेंट के बाद आईओटीए को थर्ड जेनरेशन के ब्लॉकचेन का प्रतिनिधित्व करता है। कंपनी ने हैकर्स का पता लगाने की कोशिश की लेकिन पता चला कि प्रभावित वॉलिट्स के सभी डेटा लॉग्स को उड़ा दिया गया है। इस तरह हैकर्स ने कोई सुराग नहीं छोड़ा कि बिटकॉइन्स कहां ट्रांसफर किए गए हैं। कंपनी की वेबसाइट तभी से बंद है। गुरुवार रात को कंपनी ने वेबसाइट पर एक मेसेज पोस्ट कर अपने यूजर्स को हैकिंग के बारे में जानकारी दी।
कंपनी के फाउंडर और सीईओ मोहित कालरा ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि उन्हें शक है कि हैकिंग के पीछे कंपनी के भीतर के ही किसी शख्स का हाथ है। उन्होंने कहा कि प्राइवेट कीज को कभी ऑनलाइन नहीं किया जाना चाहिए। ऐसा लगता है कि अपराध को जानबूझकर अंजाम दिया गया है। पुलिस ने बताया कि कंपनी के सर्वर को सीज कर दिया गया है ताकि किस स्तर पर हैकिंग हुई है, इसका सही-सही पता चल सके। इसकी भी जांच की जा रही है कि क्या और भी वॉलिट्स प्रभावित हुए हैं। कंपनी के सीनियर सिक्यॉरिटी ऑफिशल्स को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया है। साइबर सिक्यॉरिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि कंपनी जिस पासवर्ड को रखती है, उसे कभी भी ऑनलाइन सिस्टम से नहीं जोड़ा जाता है। लेकिन पुलिस को पता चला है कि न सिर्फ पासवर्ड्स ऑनलाइन थे, बल्कि उन्हें 12 घंटे से ज्यादा वक्त तक इस तरह रखा गया। केंद्र सरकार और आरबीआई देश भर में क्रिप्टोकरेंसी के लेनदेन पर रोक लगा चुकी है। लेकिन दिल्ली में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे सुनकर आप चौंक जाएंगे। राजधानी में स्थित एक बिटक्वाइन एक्सचेंज से 20 करोड़ रुपये के करीब 438 सिक्के चोरी हो गए हैं। क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज क्वाइनसिक्योर ने दिल्ली पुलिस की साइबर सेल में कंपनी के सीएसओ अमिताभ सक्सेना के खिलाफ केस दर्ज कर दिया है।
इसके साथ ही कंपनी ने सरकार से उसका पासपोर्ट रद्द करने की मांग भी की है। कंपनी को शक है कि वो देश छोड़कर कभी भी भाग सकता है। पुलिस ने आईपीसी और आईटी एक्ट के सेक्शन 66 में एफआईआर लिखी है। एक्सचेंज के फिलहाल पूरे देश में दो लाख से अधिक यूजर्स हैं। कंपनी को अपनी तहकीकात में पता चला कि जीतने भी बिटक्वाइन उसने ऑफलाइन स्टोर किए थे, वो सभी गायब हो गए। बाद में पता चला कि इन बिटक्वाइन के ऑफलाइन पासवर्ड को ऑनलाइन लीक कर दिया गया है। कंपनी ने हैकर्स का पता करने की कोशिश की, तो फिर सारे डाटा लॉग डिलीट कर दिए गए, जिससे यह बिटक्वाइन कहां पर ट्रांसफर किए गए हैं, इसके बारे में भी जानकारी नहीं मिल पाई। कंपनी ने अपनी वेबसाइट को इसके बाद से बंद कर दिया है। गुरुवार रात को कंपनी ने अपने सभी यूजर्स को इस चोरी की जानकारी वेबसाइट पर मैसेज के जरिए दे दी है। कंपनी के फाउंडर और सीईओ मोहित कालरा ने कहा है कि उन्हें किसी भीतरी व्यक्ति पर चोरी करने की आशंका है। कालरा ने कहा है कि अगर बिटक्वाइन वापस नहीं मिले तो फिर वो अपनी जेब से ग्राहकों को नुकसान की भरपाई करेंगे। पुलिस ने भी कंपनी के सभी प्रमुख अधिकारियों को पूछताछ के लिए बुलाया है।
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