भाजपा सांसद भूपेंद्र यादव ने साधा कांग्रेस और आम आदमी पार्टी पर निशाना, कहा…

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नई दिल्ली । दिल्ली में अवैध कालोनियों को नियमित करने वाले बिल पर बुधवार को राज्यसभा में बहस के दौरान भाजपा सांसद भूपेंद्र यादव ने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने जहां अवैध कालोनियों में रहने वाली जनता की समस्याओं के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया, वहीं दिल्ली में टैंकर माफिया का राज चलने के लिए आम आदमी पार्टी सरकार को कोसा। साथ ही दावा किया कि अवैध कालनियों के नियमित होने के बाद भाजपा सरकार हर घर नल का जल लेकर जाएगी।

भूपेंद्र यादव ने कहा कि अवैध कालोनियों को नियमित कर मोदी सरकार ने 50 लाख लोगों को भारी राहत दी है। संपत्ति का मालिक बनने के बाद मकानों की असली कीमत उन्हें मिल सकेगी। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि 2008 में दिल्ली की तत्कालीन सरकार ने कालोनी के प्रमाणपत्र के नाम झुनझुना थमाया था। आज मोदी सरकार ने जनता को विश्वास दिया है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली में तीन मास्टर प्लान बन चुके हैं। सन् 1957 में पहला आया, दूसरा मास्टर प्लान आया फिर तीसरा चल रहा है। फिर भी दिल्ली की मूल समस्या बरकरार रही। दिल्ली की 25 प्रतिशत आबादी 1731 कालोनियों में विकास के बिना रह रही थी।

उन्होंने कहा कि दिल्ली का एक हिस्सा रीवर बेल्ट का हिस्सा है। यह भूकंप क्षेत्र का हिस्सा है। वहां बनने वाले मकान की नींव के लिए उचित नक्शा होना चाहिए था। पानी की सुविधा होनी चाहिए थी। सड़क की सुविधा होनी चाहिए थी।

इस दौरान भूपेंद्र यादव ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सांसद विजय गोयल का नाम लेते हुए कहा, “गोयल साहब बताएंगे कि पूर्वी दिल्ली में कांग्रेस के किन नेताओं के नाम पर लगातार अवैध कालोनियों की बरसातें हुईं। लोगों को प्लाट पर प्लाट काटकर दिया गया। यह दिल्ली के साथ एक षड्यंत्र हुआ। आज ऐसा अवसर आया है कि पीएम मोदी के नेतृत्व में अवैध कालोनियों को नियमित किया है। प्रॉपर्टी के स्वामित्व की समस्या हल हुई है।”

भूपेंद्र यादव ने कहा कि अमृत योजना के माध्यम से दिल्ली के विकास के लिए भारी बजट की व्यवस्था हुई है, जिससे दिल्ली विश्वस्तरीय राजधानी बनेगी।

उन्होंने कहा कि कालोनियों में जल माफियाओं का राज अब नहीं चलेगा। आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि ‘टैंक माफिया को छोड़ेंगे नहीं’ का नारा जो लगाते थे, उनके राज भी भी यह समस्या दूर नहीं हुई।

उन्होंने कहा कि 1977 में यह समस्या पहचानी गई थी, तब से लेकर 2019 तक लोग अपने मकान की पूरी कीमत वसूल नहीं सकते थे। मकान की सही कीमत बताने का काम सरकार ने किया है। हर नागरिक के लिए यह राजधानी खुली हुई है।

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