बीएचयू : अब ‘काशी इनसाइक्‍लोपीडिया कोर्स’, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की मिली सहमति

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वाराणसी, बीएचयू में काशी अध्ययन कोर्स (इनसाइक्‍लोपीडिया) को शुरू करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रूचि दिखाई है। मुख्यमंत्री ने इस कोर्स को जल्द शुरू करने की बात बीएचयू के आला अधिकारियाें से कही है। इसमें बनारस से जुडे शंकराचार्य व मंडन मिश्र से लेकर तुलसी दास, कबीरदास, जैन ऋषि पार्श्वनाथ, गौतम बुद्ध, सम्राट अशोक और काशी का वैभव शामिल होगा। सामाजिक विज्ञान संकाय के प्रमुख प्रो. कौशल किशोर मिश्रा ने यह जानकारी देते हुए कहा कि नए सत्र से बीएचयू में इस अध्ययन की विधिवत शुरूआत हो जाएगी। इसके लिए सभी आवश्यक प्रस्ताव तैयार कर जल्द ही विद्वत परिषद और कार्यकारिणी की बैठक में प्रस्तुत कर पारित कराया जाएगा।

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बीएचयू में काशी अध्ययन कोर्स (इनसाइक्‍लोपीडिया) को शुरू करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रूचि दिखाई है। मुख्यमंत्री ने इस कोर्स को जल्द शुरू करने की बात बीएचयू के आला अधिकारियाें से कही है।

बनारस पर्यटन का हब बनेगा अब

देव-दीपावली पर प्रधानमंत्री मोदी के आगमन के बाद से ही काशी को पर्यटन नगर के रूप में विकसित करने की जो बात उठी है, उसमें यह कोर्स काफी सहयोग प्रदान करेगा। बीएचयू में काशी अध्ययन के अंतर्गत यहां के पौराणिक व अत्यंत प्राचीन मेले, सांस्कृतिक समारोहों और साहित्य पर अध्ययन-अध्यापन के साथ विश्वस्तरीय शोध भी होगा। इसके अलावा भारत और विदेशों से उन छात्रों को प्रवेश दिया जाएगा, जो काशी की बेहतर समझ रखते हैं। प्रो. मिश्रा के अनुसार इस अध्ययन में नाग-नथ्थैया, नक्कटैया, रथयात्रा, भरतमिलाप, सावन, लोटा- भंटा मेला व के एतिहासिक व आध्यत्मिक तथ्यों को खंगाल कर एक काशी की संस्कृति का अत्याधुनिक माडल प्रस्तुत किया जाएगा।

गलियों से फूटने वाली साहित्य व संस्कृति की धारा पर होगा शोध

प्रो. मिश्र ने बताया कि इस कोर्स के तहत बाबा काशी विश्वनाथ की नगरी का एक विस्तृत प्रारूप तैयार हो रहा है। इसमें शंकराचार्य व मंडन मिश्र से लेकर तुलसी दास, कबीरदास, जैन ऋषि पार्श्वनाथ, गौतम बुद्ध, सम्राट अशोक व साथ में सभी आध्यात्मिक व पौराणिक महत्व के पुरोधाओं पर शोध होगा, जिनका संबंध काशी से प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रहा हो। इसके अलावा यहां गलियों की संस्कृति, वहां से फूटने वाली साहित्य की पवित्र धारा और ग्लोबल मार्केट की भी कोर्स में परिचर्चा होगी। गंगा के 84 घाटों का अध्ययन, काशी के पौराणिक मंदिरों पर शोध, जीवनदायिनी मां गंगा की अविरलता और पुरातत्व की दृष्टि से एक व्यापक पाठ्यक्रम तैयार किया जाएगा।

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