बहन की स्कॉलरशिप बनी हार्दिक की ज़िंदगी का ‘टर्निंग प्वाइंट’
हार्दिक पटेल अपनी बहन मोनिका पटेल के काफी करीब हैं. घटना तब की है, जब उनकी बहन ने इंटरमीडिएट पास किया था. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 12वीं में मोनिका पटेल के 84 फीसदी मार्क्स आए थे. उन्होंने राज्य सरकार की ओर से मिलने वाली स्कॉलरशिप के लिए अप्लाई किया था, लेकिन उन्हें ये स्कॉलरशिप नहीं मिली.
हार्दिक की बहन के दोस्त को मिली स्कॉलरशिप
वहीं, मोनिका की एक दोस्त, जिसके 81 फीसदी मार्क्स आए थे, उसे ये स्कॉलरशिप मिल गई. बताया जाता है कि मोनिका के दोस्त को सिर्फ इसलिए स्कॉलरशिप मिली, क्योंकि वह आरक्षित वर्ग से थी. जबकि, मोनिका ने जिले में टॉप किया था. अपनी बहन के साथ हुई ज्यादती को बर्दाश्त करना हार्दिक पटेल के लिए बहुत मुश्किल था. ये घटना हार्दिक के लिए टर्निंग प्वॉइंट साबित हुई.17 साल में हार्दिक ने ज्वॉइन की थी SPG
साल 2010 में हार्दिक ने सरदार पटेल ग्रुप (SPG) ज्वॉइन किया. तब उनकी उम्र महज 17 साल थी. हार्दिक के दोस्त बताते हैं कि वह बचपन से ही काफी शांत और अपने में सीमित रहने वाले थे. उन्हें क्रिकेट देखने और खेलने का शौक था. हार्दिक के दोस्तों के मुताबिक, उनमें काफी लीडरशिप क्वालिटी थी.
लीडरशिप क्वालिटी से बन गए एसपीजी प्रेसिडेंट
सरदार पटेल ग्रुप में हार्दिक पटेल ने इसी लीडरशिप क्वालिटी का फायदा उठाया. अपने विचारों से उन्होंने करीब एसपीजी के सदस्यों को काफी कम वक्त में प्रभावित कर लिया. एक महीने के दौरान हार्दिक एसपीजी के विरामगम ब्रांच के प्रेसिडेंट बन गए.
आर्थिक उतार-चढ़ावों को करीब से देखा
एसपीजी में रहते हुए हार्दिक पटेल ने आर्थिक उतार-चढ़ावों को करीब से देखा और समझा. उन्होंने महसूस किया कि कैसे आर्थिक उतार-चढ़ाव और सरकार की नीतियां पाटीदार युवाओं पर असर डाल रही है. खेतीबाड़ी पर असर पड़ रहा है. व्यापार चौपट हो रहे हैं. ऑनलाइन आउटले की वजह से कैसे पुश्तैनी व्यापार ठप हो रहे हैं. फिर एसपीजी के सदस्यों के साथ उनके मतभेद होने लगे. ऐसे में हार्दिक को एसपीजी से बेदखल कर दिया गया. इसी दौरान हार्दिक की बहन के साथ स्कॉलरशिप वाली घटना हुई.
2015 में बनाई PAAS
इसी घटना के बाद हार्दिक ने जुलाई 2015 में पाटीदार अनामत आंदोलन समिति (PAAS) बनाई. इसका मकसद पाटीदारों के लिए सरकार से ओबीसी कोटे की मांग थी. राज्य से ये चिंगारी कब केंद्र तक आ पहुंची पता ही नहीं चला. फिर तो दूसरे राज्यों में भी लोग इस तरह की मांग करने लगे.
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