नई दिल्ली । भारतीय पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी को साहस के लिए लंदन प्रेस फ्रीडम अवार्ड 2018 से सम्मानित किया गया है। सत्ताधारी भाजपा की आईटी सेल को लेकर खोजी पत्रकारिता के लिए उन्हें इस अवार्ड के लिए चुना गया। उन्हें यह पुरस्कार ऑनलाइन ट्रोलिंग और उत्पीड़न का साहस के साथ सामना करने और सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी की आईटी सेल का खुलासा करने के लिए दिया गया है। वे ’आई एम ए ट्रोल: इनसाइड द सीक्रेट वर्ल्ड ऑफ द बीजेपीज डिजिटल आर्मी’ पुस्तक की लेखिका भी हैं। इस पुरस्कार के लिए नामित इटली, तुर्की और मोरक्को के पत्रकारों को मात देकर उन्होंने इस पुरस्कार को हासिल किया है।
आरएसएफ यूके ब्यूरो के निदेशक रेबेका विंसेंट ने कहा कि अच्छी पत्रकारिता को पहचानना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह एकजुटता का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि एक अंतर्राष्ट्रीय समुदाय फ्री मीडिया के लिए हमेशा खड़ा होगा, चाहे वह किसी के द्वारा ही खतरे में क्यों न हो। बता दें कि इस समारोह में पिछले महीने इस्तांबुल में सऊदी दूतावास में सऊदी अरब पत्रकार जमाल खशोगगी की हत्या के मद्देनजर पत्रकारों की सुरक्षा और प्रेस स्वतंत्रता के महत्व पर भी चर्चा की गई।
पुरस्कार जीतने पर स्वाति ने कहा, ‘यह मेरे लिए काफी अहमियत रखता है। मुझे नहीं लगता कि पत्रकारों ने अपना काम करना बंद कर दिया है, लेकिन पूरे दुनिया की सरकारें अपनी आलोचना को लेकर असहिष्णु हो गई हैं। मुझे ऑनलाइन काफी धमकियां दी गईं, लेकिन मैंने इसकी परवाह नहीं की। अगर मैं ऐसा करती तो अपना काम नहीं कर पाती।’ इस कार्यक्रम का आयोजन गुरुवार रात रिपोर्ट्स सैंस फ्रंटियर्स (आरएसएफ) और रिपोर्ट्स विदआउट बॉर्ड्स ने किया था।
इन दिनों सोशल मीडिया ट्रोलिंग आम फिनोमिना बन चुका है। इसके तहत जैसे ही आप सत्ता सरकार को जायज और जरूरी मुद्दों पर घेरने का प्रयास करते हैं या अपनी बात स्वतंत्रतापूर्वक रखने का प्रयास करते हैं, वैसे ही एक खास विचारधारा वाले लोगों की आईटी फौज आप पर टूट पड़ती है। वे आपके बारे में भद्दे और अश्लील शब्दों, गालियों और ऊल-जलूल कुतर्कों से रौंदने का प्रयास करने लगते हैं। इसके पीछे सोची-समझी साजिश होती है, जिसका मकसद होता है, देश के नागरिकों का ध्यान मुख्य मुद्दों से भटकाकर किन्हीं सतही मुद्दों जैसे आपसी घृणा और वाद-विवाद में उलझा देना।
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