प्रदेश के सहकारिता मंत्री श्री मुकुट बिहारी वर्मा आज पी0सी0यू0 सभागर में सहकारिता विभाग के विगत 4 वर्ष की वर्तमान सरकार के कार्यकाल में हुयी उल्लेखनीय उपलब्धियां के संबंध में प्रेस प्रतिनिधियों से वार्ता के दौरान यह जानकारी दी

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लखनऊ:
 उ0 प्र0 कोआपरेटिव बैंक एवं 50 जिला सहकारी बैंकों द्वारा फसली ऋण के क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि हासिल की गयी है। वर्ष 2017-18 मंे 14.17 लाख कृषकों को रू. 3908 करोड़ का फसली ऋण वितरण किया गया था जबकि 2018-19 में 15.45 लाख कृषकों में यह राशि 5163 करोड़ रू. वितरित की गयी एवं वर्तमान वित्तीय वर्ष 2019-20 में 29-02-2020 तक 16.75 लाख काश्तकारों में रू. 6151 करोड़ रू. का ऋण वितरण हो चुका है। दिनांक 15-03-2021 तक रू. 6735.29 करोड़ का वितरण किया जा चुका है। चीनी उद्योग को वर्ष 2017-18 में लगभग रू. 4200 करोड़ का ऋण उपलब्ध कराया गया जबकि 2018-19 में रू. 4819 करोड़ का ऋण उपलब्ध कराया गया है। वित्तीय वर्ष 2019-20  में यह धनराशि 5319 करोड़ रू. से अधिक हुआ है जिससे गन्ना काश्तकारों के भुगतान में योगदान किया गया है। अभी तक चीनी मिलों की मांग पर 888.10 करोड़ का वित्त पोषण उपलब्ध कराया जा चुका है।
 प्रदेश में 16.91 लाख काश्तकारों को किसान क्रेडिट कार्ड प्रदान किये गये हैं जिसमें 9.59 लाख किसान क्रेडिट कार्ड सक्रिय कर दिये गये हैं। जिला सहकारी बैंकों के क्षेत्र में मोबाइल ए.टी.एम. सेवाएं प्रारम्भ कर दी गयी हैं। विगत वर्ष मंे लगभग 544 करोड़ रू0 का लेनदेन हुआ है। फसली ऋण मोचन योजना के अन्तर्गत विभिन्न सहकारी बैंकों से आच्छादित 484273 किसानों को लगभग 634 करोड़ रू. की ऋण माफी का लाभ दिया गया है।
 16 कमजोर जिला सहकारी बैंकों को रू. 2063 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान करते हुए इनके लाइसेन्स भारतीय रिजर्व बैंक से पुनः प्राप्त कर इन्हें स्वावलम्बी बनाने की कार्रवाई हुई है।
 उ0 प्र0 कोआपरेटिव बैंक द्वारा भारतीय रिजर्व बैंक से लाइसेन्स प्राप्त कराकर अपने निजी प्लेटफार्म पर अपने स्वयं के आई.एफ.एस.सी. कोड के तहत आर.टी.जी.एस. एवं एन0ई0एफ0टी0 सेवाएं उ0 प्र0 कोआपरेटिव बैंक एवं 50 जिला सहकारी बैंको में सफलता पूर्वक लागू की गयी हैं। अब भारतीय रिजर्व बैंक से लाइसेंस प्राप्त कर इण्टरनेट बैंकिंग की सुविधा भी लागू करने की कार्यवाही प्रचलित है।
 सभी पैक्स को माइक्रो ए0टी0एम0 दिया जा रहा है। इससे जिला सहकारी बैकों के बैकिंग कार्यकलाप ग्रामीण स्तर तक पहुचेगें।
 समस्याग्रस्त उ0 प्र0 सहकारी ग्राम विकास बैंक को स्वावलम्बी बनाने हेतु सघन कार्यक्रम चलाया जा रहा है। लगभग बन्द हुयी ऋण वितरण प्रक्रिया को पुनः चालू करते हुए विगत 4 वर्षों में ऋण वसूली का अभियान चलाकर नाबार्ड एवं अन्य संस्थाओं को देय ऋण के किश्त की धनराशि अपनी वसूली से प्राप्त होने वाली आय से शत-प्रतिशत अदा करने की स्थिति में बैंक पहुँच गया है। कृषकों को एक मुश्त समाधान योजना का लाभ प्रदान करते हुए  विगत 3 वर्षाें में 28-02-2021 तक रू. 1181.14 करोड़ ऋण की वसूली की गयी है। विगत 03 वर्षो में लगभग 2670 करोड़ रू0 की वसूली कर लगभग 2200 करोड़ रू0 की देनदारी समाप्त की गयी है। ऋण वितरण भी प्रारम्भ किया गया है। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम से ऋण प्राप्त करके व्यवसाय बढ़ाने एवं इन कमजोर वर्गाें को काश्तकारों को 04 से 06 प्रतिशत के  ब्याज पर कमजोर वर्गाे के विकास हेतु ऋण उपलब्ध कराने की कार्यवाही की जा रही है।
 जिला सहकारी बैंकों के आधुनिकीकरण एवं कम्प्यूटराइजेशन/आधुनिक आनलाइन सेवाओं की प्रक्रिया प्रारम्भ की गयी है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना के अन्तर्गत 3.85 लाख कृषकों को रू. 196.49 करोड़ की धनराशि हस्तान्तरित की गयी है। सभी सहकारी समितियों में लगभग 25 वर्ष बाद अभियान चलाकर आडिट एवं ए.जी.एम. कराया गया है।
 मूल्य समर्थन योजनान्तर्गत सहकारिता विभाग द्वारा विगत 3 वर्षों 2017-18, 2018-19 एवं 2019-20 में 47 लाख मै.टन से अधिक धान एवं 71.5 लाख मै0टन गेहूॅं खरीद की गयी है जिससे लगभग 692826 काश्तकार लाभान्वित हुए हैं। वर्तमान वित्तीय वर्ष 2020-21 में विभाग द्वारा 22.51 लाख मै. टन गेहूं जिसका मूल्य रू. 4334 करोड़ है, खरीदकर 4.35 लाख किसानों को लाभान्वित किया गया है। वर्तमान धान खरीद में भी सहकारिता विभाग के तीनों क्रय एजेन्सियोें द्वारा 27.50 लाख मै0टन की धान खरीद की गयी है। जो अबतक की सर्वाधिक खरीद है। कृषकों को 5140 करोड़ का भुगतान किया गया है। जिससे 5,32875 कृषक लाभान्वित हुए है। मूल्य समर्थन योजनान्तर्गत काश्तकारों का भुगतान आर.टी.जी.एस./  पी.एफ.एम.एस. प्रणाली के माध्यम से लाभार्थी कृषकों के खाते में सीधे भेजा गया है।
 पी.सी.एफ. द्वारा वर्ष 2017-18 में 33 लाख मै0 टन फास्फेटिक एवं यूरिया का वितरण किया गया है। वर्ष 2018-19 में 35 लाख मै0टन एवं वित्तीय वर्ष 2019-20 में  36.96 लाख मै0 टन खाद वितरण किया गया है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में लगभग 40 लाख मै0 टन खाद वितरण किया जा रहा है।
 उ0 प्र0 राज्य भण्डारण निगम द्वारा वर्ष 2017-18 में 26.67 लाख मै. टन गेहूॅं एवं 18.33 लाख मै. टन चावल, कुल 45 लाख मै. टन खाद्यान्न का भण्डारण हुआ जो विगत वर्षों के सापेक्ष दोगुना से अधिक रहा है। इसी प्रकार वर्ष 2018-19 में 37.64 लाख मै. टन गेहूॅं एवं 20.14 लाख मै. टन चावल कुल 55.75 लाख मै. टन खाद्यान्न का भण्डारण किया गया है। इस अवधि में उ0 प्र0 राज्य भण्डारण निगम द्वारा 90.5 प्रतिशत की भण्डारण क्षमता की उपयोगिता दर्ज की गयी है एवं वर्ष 2017-18 में 74.90 करोड़ रू. एवं वर्ष 2018-19 में 84.93 करोड़ रू. का शुद्ध लाभ दर्ज किया गया है। वर्ष 2019-20 में 26.15 लाख मै.टन गेहूं, 25.80 लाख मै.टन चावल का भण्डारण किया गया एवं निगम द्वारा लगभग 98 करोड़ शुद्ध लाभ अर्जित किया गया।
 उ0 प्र0 राज्य भण्डारण निगम की भण्डारण क्षमता में वृद्धि हेतु मण्डी समितियों से उपलब्ध करायी गयी भूमि पर 2 लाख मै.टन क्षमता के गोदामों का निर्माण कराया जा रहा है। सहकारिता विभाग के अधीन अन्य सहकारी समितियों की भूमि पर लगभग 125 गोदाम 100 मै0टन, 250 मै0टन के बनाये जा रहे है। भण्डारण क्षमता सृजन की कार्रवाई प्रगति पर है। पी.ई.जी. योजना के अन्तर्गत निजी उद्यमियों द्वारा 6.85 लाख मै.टन की भण्डारण क्षमता सृजन करने की प्रक्रिया प्रगति पर है। कुल 10 लाख मै.टन क्षमता के गोदामों का निर्माण प्रक्रियाधीन है।
 उ0 प्र0 शासन के निर्देशों के क्रम में 521 संविदाकर्मियों का विनियमितीकरण किया गया है। संस्था में गुणवत्ता परख एवं अच्छे कार्यों हेतु भारत सरकार द्वारा गोल्ड मेडल एवं ओवरआल परफोरमेन्स से सम्मानित किया गया है।
 उ0 प्र0 राज्य निर्माण सहकारी संघ एवं उ0 प्र0 राज्य निर्माण एवं श्रम विकास सहकारी संघ द्वारा (शासन द्वारा घोषित निर्माण इकाईयां) विगत 3 वर्षों में 5000 से अधिक निर्माण कार्यों को प्रारम्भ करते हुए अबतक लगभग 1100 कार्यपूर्ण कराये गये हैं एवं 4000 से अधिक कार्य निर्माणाधीन हैं। यह दोनों संस्थाएं शुद्ध लाभ पर कार्य कर रही हैं। वर्ष 2018-19  में उ0 प्र0 राज्य निर्माण सहकारी संघ का शुद्ध लाभ रू. 17.39 करोड़, वर्ष 2019-20 में 23.18 करोड़ शुद्ध लाभ अर्जित किया गया है तथा उ0 प्र0 राज्य निर्माण एवं श्रम विकास सहकारी संघ का वर्ष 2018-19 में शु़़द्ध लाभ रू. 6.13 करोड़ एवं वर्ष 2019-20 में रू. 13.10 करोड़ लाभ पर है।
 एकीकृत सहकारी विकास परियोजना के अन्तर्गत प्राथमिक सहकारी समितियों के स्तर पर 202 नये गोदामों का निर्माण प्रारम्भ कराया गया है जिसमें 50 गोदामों को कार्य पूर्ण हो गया है एवं 144 का कार्य प्रचलित है। 584 गोदामों के मरम्मत/ सुदृढीकरण का कार्य प्रारम्भ किया गया है जिसमें से 177 गोदाम पूर्ण हो गये हैं एवं 407 गोदामों का कार्य प्रचलित है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत 100 मै.टन के 100 गोदामों का निर्माण प्रगति पर है। वर्तमान में कुल 13 जनपदों में योजना चल रही है योजना का कार्यकाल 05 वर्ष का होता है। राज्य स्तरीय समन्वय समिति से 10 जनपदों का डी0पी0आर0 स्वीकृत किया गया है। जो एन0सी0डी0सी0 नई दिल्ली को प्रेषित किया जा रहा है।
 इस प्रकार सहकारिता विभाग की शीर्ष सहकारी संस्थाओं द्वारा कृषकों के हितों को ध्यान मंे रखते हुये उल्लेखनीय कार्य किया जा रहा है तथा विगत 04 वर्षो में इन संस्थाओं द्वारा अपने कार्यो में उत्तरोत्तर वृद्धि दर्ज की गयी हैै। सहकारिता विभाग द्वारा प्रदेश के कमजोर व गरीब वर्ग के कृषकों के सेवा में बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान दिया जा रहा है।
प्रेस वार्ता के दौरान अपर मुख्य सचिव सहकारिता श्री एम0वी0एस0 रामी रेड्डी, प्रबंध निदेशक श्री भूपेन्द्र कुमार, श्री मनोज द्विवेदी, श्री धीरेन्द्र सिंह सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

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