श्रीनगर। राज्य सरकार ने आज जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला की नजरबंदी को खत्म करने का आदेश जारी कर दिया। फारूक अब्दुल्ला करीब सात माह की हिरासत के बाद रिहा हुए। वे मीडिया के सामने आए और उन्होंने अपने घर की छत से बात करते हुए कहा कि मेरे पास कहने के लिए शब्द नहीं हैं। मैं आज आजाद हुआ हूं। अब मैं दिल्ली जा सकूंगा। संसद में आपकी बात को उठा सकूंगा।
मैं उन सभी लोगों को शुक्रिया कहना चाहूंगा, जिन्होंने हमारे लिए आवाज उठाई। आजादी तब पूरी होगी, जब बाकी के नेता भी आजाद हो जाएंगे। मुझे आशा है कि वे भी जल्द छूटेंगे। इससे पहले फारूक की रिहाई के फैसले के बाद जम्मू में नेशनल कांफ्रेंस के नेता दविंदर राणा ने कहा कि उन पर सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) लागू करना गलत फैसला था। मैं इसे रद्द करने के फैसले का स्वागत करता हूं। अन्य सभी राजनीतिक बंदियों को भी रिहा किया जाना चाहिए ताकि जम्मू और कश्मीर की आवाज हर जगह पहुंच सके।
उल्लेखनीय है कि अनुच्छेद-370 हटने के बाद यानी 5 अगस्त को फारूक अब्दुल्ला को हाउस अरेस्ट कर दिया गया था। इसके बाद 15 सितंबर से उन्हें नजरबंद कर दिया गया था। करीब 6 महीने बाद सरकार ने उनकी नजरबंदी को खत्म किया है और वे अभी भी हाउस अरेस्ट हैं।
आपको बताते जाए कि फारूक अब्दुल्ला को 5 अगस्त से हाउस अरेस्ट में रखा गया था, लेकिन सरकार ने उनके खिलाफ पिछले साल 15 सितंबर को पब्लिक सेफ्टी एक्ट तहत केस दर्ज किया था। इसके बाद उन्हें तीन महीने के लिए नजरबंद कर दिया गया, तीन महीने की मियाद 15 दिसंबर को खत्म होने वाली थी, उससे दो दिन पहले यानी 13 दिसंबर को उनकी नजरबंदी 3 महीने के लिए बढ़ा दी गई थी। अब फारुक की नजरबंदी को खत्म करने का निर्णय किया गया है।
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