पिता जेल में और मां राज्यबदर, बेटी ने जीत की लगायी हैट्रिक बन गई MLA

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हजारीबाग। एक ही विधानसभा क्षेत्र से पिता और मां की जीत के बाद बेटी अंबा प्रसाद ने जीत को बरकरार रखते हुए अपने मां-बाप की बहादुर और सफल बेटी होने का फर्ज निभाते हुए कांग्रेस को जीत की हैट्रिक का तोहफा दिया।

बड़कागांव से कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल कर इतिहास रचनेवाली अंबा प्रसाद ने पिता योगेंद्र साव और मां निर्मला देवी के आंदोलन को न सिर्फ जिंदा रखा, बल्कि उनकी राजनीतिक विरासत को भी बचाए रखने में कामयाब हुईं।

बड़कागांव विधानसभा में पांचवी बार जीत की हैट्रिक लगी है। इससे पहले भी जो प्रत्याशी पहली बार यहां से चुनाव जीते, उन्होंने जीत की हैट्रिक बनाई। मात्र 27 साल की उम्र में उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी आजसू पार्टी के प्रत्याशी रोशनलाल चैधरी को 30,140 मतों से हरा कर जीत दर्ज की। कांग्रेस प्रत्याशी अंबा प्रसाद को 93,295, वहीं रोशनलाल चैधरी को 63,116 वोट मिले।

इस बार के चुनाव में अंबा के लिए एक बात खास रही कि विरोधी पार्टियां उनकी पार्टी और उनके माता-पिता को तो निशाना बना रही थीं, लेकिन खुद इनके खिलाफ बोलने के लिए उनके पास कुछ खास नहीं था।

अंबा प्रसाद के पिता और राज्य के पूर्व मंत्री योगेंद्र साव अभी जेल में हैं और मां निर्मला अदालत के आदेश से तड़ीपार हैं। बावजूद इसके इनका नाम क्षेत्र में तब सुर्खियों में आया जब इस साल लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ इन्होंने कांग्रेस के प्रत्याशियों के लिए रैलियां और सभाएं कीं।

अंबा ने कभी सोचा भी न था कि वे विधायक बनेंगी, लेकिन माता- पिता के जेल जाने और राज्य बदर होने के बाद उन्होंने शपथ ली थी कि बड़कागांव विधानसभा क्षेत्र में माता -पिता के अधूरे कार्यों को वे पूरा करेंगी। पिछले चार वर्षों से वे क्षेत्र में सक्रिय रहीं।

कार्मेल स्कूल से पढ़ाई करने के बाद 12वीं की पढ़ाई डीएवी स्कूल, हजारीबाग से पूरी की। 2009-12 में विभावि से एलएलबी की डिग्री हासिल करने के बाद संत जेवियर्स कॉलेज, रांची से 2012-14 में पीजीडीएम (एचआर) की डिग्री हासिल की।

उसके बाद सिविल सर्विसेज की तैयारी के लिए दिल्ली चली गईं। इसी क्रम में कफन सत्याग्रह के दौरान माता निर्मला देवी और पिता योगेंद्र साव को जेल भेज दिया गया, तो अंबा प्रसाद दिल्ली की पढ़ाई छोड़कर हजारीबाग लौट आई। फिर हजारीबाग कोर्ट में प्रैक्टिस शुरू किया और माता -पिता पर दर्ज मुकदमों को उन्होंने देखना शुरू कर दिया।

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