नई दिल्ली । जिन दिनों दिल्ली और देश के अन्य भागों में नागरिकता संशोधक कानून के विरोध में शांति प्रदर्शन के नाम हो रहे प्रदर्शनों में आगजनी और पत्थरबाज़ी की घटनाएं होने पर अक्सर एक बात लिखता था, “कहीं ये पत्थरबाज़ी और आगजनी गोधरा न बन जाये”, लेकिन इस बात पर किसी ने ध्यान नहीं दिया, जो आज हकीकत में सच हो रहा है। गोधरा का मतलब शायद मार-काट से लिया, परन्तु वास्तविकता को नहीं भांप पाए।
शांति प्रदर्शन के नाम पर दंगा करते वक़्त दंगाइयों ने यह नहीं सोंचा कि “आज देश में मनमोहन सिंह की सरकार नहीं, जो उन्हें बचाने के लिए बेकसूरों को जेलों में डाल देगी।
जिस तरह इस्लामिक आतंकवादियों को बचाने के लिए बेकसूर हिन्दू साधु-संत जैसे स्वामी असीमानंद, साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित आदि को जेल में डाल वो यातनाएं दी गयीं । आज देश में वह सरकार है, जो दंगाइयों को सात समुन्दर पार से भी खींच लाएगी।” खूब नारेबाजी हुई “हिन्दुत्व तेरी कब्र खुदेगी”, “मोदी तेरी कब्र खुदेगी”, “योगी तेरी कब्र खुदेगी” आदि के अलावा #not in my name, #award vapasi, #metoo, #mob lynching और #intolerance आदि गैंगस्टर सक्रिय हो गए थे। देश का सौहार्द बिगाड़ने का प्रयत्न किए जा रहे थे।
मई 23 को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने नताशा नरवाल और देवांगना कलिता नाम की दो महिलाओं को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगे के मामले में गिरफ्तार किया था। दोनों महिलाएँ लेफ्ट एक्टिविस्ट ग्रुप पिंजरा तोड़ की सदस्य हैं।
पिंजरा तोड़ के सदस्यों ने 22 फरवरी की शाम को नागरिकता संशोधन एक्ट (सीएए) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के लिए स्थानीय निवासियों को भड़काया और उन्हें जाफराबाद मेट्रो स्टेशन पर इकट्ठा होने के लिए कहा। जानकारी के अनुसार “22 फरवरी की रात 10 बजे मेट्रो स्टेशन पर सीएए के खिलाफ विरोध करने वाले प्रदर्शनकारी एकत्र हुए। हमने सोचा कि वे सीलमपुर सर्विस लेन पर पुरानी साइट पर इकट्ठा होंगे, जो लगभग एक किलोमीटर दूर है।”
पता चला है कि दिल्ली के दंगों को भड़काने के लिए गिरफ्तार की गई दोनों महिलाएँ लेफ्ट ग्रुप पिंजरा तोड़ की संस्थापक सदस्य थीं जिसे 2015 में स्थापित किया गया था। पिंजरा तोड़ को मुख्य रूप से दिल्ली के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में हॉस्टल कर्फ्यू के विरोध में शुरू किया गया था, हालाँकि, इस संगठन का मक़सद असल में अपनी लेफ्टिस्ट विचारधारा को आगे बढ़ाना है।
पिंजरा तोड़ के सह-संस्थापक “नताशा नरवाल” जिसे दिल्ली के हिंदू-विरोधी दंगों को उकसाने के लिए गिरफ्तार किया गया है, वो पहले कई वामपंथी झुकाव वाले ऑनलाइन पोर्टल्स की कॉलमनिस्ट भी रह चुकी है। नताशा नरवाल ने वामपंथी प्रोपेगेंडा पोर्टल ‘द वायर’ के लिए तीन लेख लिखे थे।
क्या है पिंजरा तोड़ ग्रुप?
पिंजरा तोड़ ग्रुप कॉलेज की छात्राओं का एक संगठन है, जिसमें दिल्ली यूनिवर्सिटी के नामी कॉलेजों की लड़कियां भी हैं। ये संगठन कॉलेज हॉस्टल के नियमों के खिलाफ काम करता है। दिल्ली में सीएए को लेकर हुई हिंसा में कई बार इस संगठन का नाम सामने आया है। इस ग्रुप में कॉलेज की मौजूदा छात्राएं तो होती ही हैं, साथ ही उस कॉलेज से पढ़कर निकल चुकी छात्राएं भी होती हैं। इस ग्रुप की छात्राओं की मांग होती है कि हॉस्टल और पीजी में महिला छात्रों पर कम से कम प्रतिबंध हों। इस ग्रुप की महिलाओं का तर्क होता है कि महिलाओं की सुरक्षा के नाम पर उनके अधिकार नहीं छीनने चाहिए। महिलाओं को पूरी आजादी से जीने का हक होना चाहिए।
Leave a Reply