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म.प्र. के इंदौर के राजबाड़ा के मुख्य गेट के पास ओटले पर माता-पिता के बीच सोई चार माह की बच्ची के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के मामले में न्यायालय ने एक शख्स को फांसी की सजा सुनाई। जज ने 7 दिन तक सात-सात घंटे सिर्फ इसी केस को सुना और 21 दिन में सुनवाई पूरी होने के बाद 23 वें दिन शनिवार को फैसला सुनाया। बता दें कि नया कानून पॉक्सो बनने के बाद किसी आरोपी को फांसी की सजा सुनाने का यह पहला मामला है।
हाल ही में केंद्र सरकार ने पॉस्को कानून में संशोधन कर 12 साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ बलात्कार करने वालों के खिलाफ मौत की सजा के कानून को मंजूरी दी थी। नए कानून के तहत अब यदि बलात्कार के मामले में लड़की की आयु 12 साल से कम होगी, तो बलात्कारी को मौत की सजा होगी। यह घटना 20 अप्रैल की है। बच्ची अपने माता-पिता के साथ सो रही थी।
तभी दोषी नवीन उर्फ अजय गड़के ने बच्ची को उठाकर श्रीनाथ पैलेस बिल्डिंग के बेसमेंट में ले गया था, जहां उसके साथ 15 मिनट तक दुष्कर्म किया। फिर बिल्डिंग की छत से फेंककर उसकी हत्या कर दी। नवीन पीड़ित बच्ची का मौसा है और वह बच्ची के माता-पिता के साथ ही रहता था। इस मामले में 28 अप्रैल से ट्रॉयल शुरू हुआ। 1 मई से जिला कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई। 8 मई को 29 गवाहों के बयान लिए गए। 9 मई को आरोपी का बयान हुआ।
इस दौरान कोर्ट ने दोषी से 80 सवाल किए। आरोपी ने कहा कि मेरे खिलाफ सभी आरोप झूठे हैं। 10 मई को आखिरी बहस हुई और कोर्ट ने 12 मई तक फैसला सुरक्षित रख लिया।
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