पापा और मम्‍मी की मेहनत की कमाई, लाडलों ने Online Games में इस तरह गंवा रहे, लग नहीं भनक भी

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आगरा, न्यू आगरा क्षेत्र निवासी व्यापारी ने साइबर रेंज थाने में अपने बैंक खाते से करीब 50 हजार रुपये साइबर शातिरों द्वारा निकालने की शिकायत की। साइबर टीम ने छानबीन शुरू की। एक सप्ताह में मामले का पर्दाफाश कर लिया। पीड़ित को आरोपित का नाम बताया तो उसके पैर के नीचे की जमीन खिसक गई। आरोपित कोई और नहीं उनका बेटा था। उसने पिता के 50 हजार रुपये से ज्यादा की रकम आनलाइन गेम में गंवा दी थी। पिता ने यह रकम कई महीनों में किस्त में जोड़ी थी। व्यापारी पिता ने पुत्र से जानकारी की तो पता चला उसने एक बार आनलाइन गेम खरीदा था। इसके बाद जैसे-जैसे गेम का लेवल बढ़ता गया, पिता के खाते से रकम खुद ब खुद कटती चली गई।

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आगरा साइबर रेंज थाने और पुलिस साइबर सेल में इस वर्ष आईं 150 से ज्यादा शिकायतें। 20 फीसद मामलों मे खातों से रकम निकालने वालों में परिचित या परिवार के लोग। आनलाइन गेम खेलने में भी बच्चों ने गंवाई पापा-मम्मी के खाते में जमा रकम।

केस दो: सदर क्षेत्र निवासी एक फैक्ट्री में काम करने वाले कर्मचारी ने साइबर सेल में अपने खाते से रकम निकाले जाने की शिकायत की। यह रकम अलग-अलग ई-वालेट में आनलाइन ट्रांसफर की गई थी। साइबर सेल ने छानबीन शुरू की, आरोपित का पता लगा लिया। मगर, जब उसका नाम-पता पीड़ित को दिखाया तो उसे अपनी शिकायत वापस लेनी पड़ी। इसका कारण खाते से रकम ट्रांसफर करने वाला कोई और नहीं उनका नाबालिग बेटा था। पुत्र को बुलाकर बातचीत की गई तो पता चला कि उसने यह रकम आनलाइन गेम खरीदने में खर्च की थी।

साइबर क्राइम से पीड़ित 20 फीसद मामलों में खाते से रकम निकालने वाले अपने ही लोग सामने आ रहे हैं। वह पीड़ित के परिचित या रिश्तेदार है। इसके अलावा कई मामलों में पापा की मेहनत की कमाई को खाते से निकालने वाले उनके अपने ही बच्चे हैं।

बच्चों ने लाइन गेम खरीदने और खेलने के लिए पिता के खाते से आनलाइन ट्रांजिक्शन किया था। पिता को इसकी जानकारी मैसेज आने पर या पासबुक को बैंक जाकर अपडेट कराने पर होती है। साइबर रेंज थाने और अागरा पुलिस की साइबर सेल में खाते से रकम निकालने की जांच के दौरान से कई मामले सामने आए।

साइबर रेंज थाने और पुलिस साइबर सेल में इस साल 150 से ज्यादा शिकायतें आईं। रकम निकालने वाले पीड़ितों के परिचत भी थे। सदर के सेवला इलाके में रहने वाले युवक के खाते से उसके दोस्त ने ही करीब दो लाख रुपये आनलाइन विभिन्न ई-वालेट में ट्रांसफर कर दिए थे। साइबर रेंज थाने की पुलिस ने जांच में आरोपित का नाम-पता सामने आने के बाद उस पर दबाव बनाया। खुद को फंसता देखकर दोस्त के खाते में रकम वापस जमा कराई।

ई-फ्राड से बचाव

  • जब कभी आप आनलाइन शापिंग या इंटरनेट बैंकिंग का इस्तेमाल करते हैं तो लागइन पेज पर उपलब्ध कराए गए वर्चुअल की बोर्ड के माध्यम से ही लागइन करें। ऐसा करने से आप बहुत खतरों से स्वत: बच जाते हैं।

  • आनलाइन शापिंग या बैंकिंग आप ऐसे कंप्यूटर, लैपटाप या मोबाइल से करें जिसमें जेनुअन ओएस या एंटी वायरस उपलब्ध हो।

  • अपना बैंकिंग पासवर्ड किसी के भी साथ भी साझा न करें। यहां तक कि परिवारिक सदस्यों के साथ भी ऐसा न करें। क्योंकि बहुत बार पारिवारिक सदस्यों के माध्यम से अन्य लोग फ्राड करने का प्रयास करते हैं।

-कभी भी अपना बैंक का या क्रेडिट कार्ड का विवरण किसी भी व्यक्ति को फोन, वाट्सएप, एसएमएस या ईमेल पर साझा न करें। क्योंकि बैंक कभी भी आपसे एकाउंट संबंधी विवरण नहीं मांगता।

-जब कभी भी आप अपना डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड शापिंग के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं तो उसे अपनी आंखों के सामने ही स्वैप कराएं या करने दीजिए।

  • अपने क्रेडिट कार्ड, एटीएम कार्ड पर लिखे सीवीवी कोड को इरेज कर दीजिए  और उसे हमेशा याद रखिए।

-आयकर रिटर्न उपलब्ध कराने संबंधी सभी ईमेल फर्जी होती हैं। उस पर कोई प्रतिक्रिया न करें।

-जब कभी आनलाइन शापिंग या इंटरनेट बैंकिंग का इस्तेमाल कर रहे हैं तो हमेशा एड्रेस बार में https तथा padlock का चिन्ह जरूर देखें । हमेशा बैंकिंग, शापिंग, पोर्टल की ओरिजनल साइट पर जाकर ही कार्यवाही करें।

-अपने क्रेडिट कार्ड, बैंक खाते में हमेशा एसएमएस अलर्ट की सुविधा सक्रिय रखें। जब कभी भी अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर किसी कारण से बदलते हैं तो अपने बैंक को अवश्य सूचित करें। अपने खाते, क्रेडिट कार्ड खाते में अपडेट कराना सुनिश्चित करें।

-कभी भी अपना ओटीपी किसी से साझा न करें।

वर्तमान में प्रचलित फ्राड से इस तरह बच सकते हैं

-किसी भी अंजान व्यक्ति के कहने से अपने मोबाइल पर anydesk/ammyydesk/team viewer quick support आदि एप इंस्टाल न करें। ऐसा करने पर दूर बैठे साइबर शातिर पूरी तरह से आपकी स्क्रीन पर साझा करने के साथ आपके मोबाइल पर कब्जा कर लेते हैं।

-कभी भी अपना डिजीटल वालेट या एकाउंट केवाइसी आनलाइन अपडेट न करें।

-आनलाइन खरीद फरोख्त वाली वेबसाइट पर कोई सामान या सेवा खरीदने से पहले विक्रेता के संबंध में पूर्ण जानकारी वेरीफाई करें। जैसे उसके खाते में अंकित नाम-पता आदि।

-किसी अंजान व्यक्ति द्वारा आपको भेजे गए कुछ रकम प्राप्त करने संबंधी लिंक या क्यूआर कोड को अपने फोन से स्कैन न करें। साइबर शातिर आपको विश्वास में लेने के लिए ऐसी पहल करते हैं।

-किसी डिजीटल वालेट या इंश्योरेंस सेवा आदि के कस्टमर केयर का नंबर गूगल से सर्च न करें। हमेशा उसे कंपनी की वेबसाइट पर उपलब्ध कस्टमर केयर से सर्च करें। साइबर शातिर गूगल पर अपना विवरण शीर्ष पर डालने में सफल हो जाते हैं। अनजान व्यक्ति ऐसी साइट पर अपनी समस्याएं बताते समय अपनी महत्वपूर्ण सूचना साझा कर बैठते हैं। जिसका बाद में दुरुपयोग हो जाता है।

 

 

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