कानपुर, बड़ी परियोजनाओं के लिए सही और सुगम रास्ते का चयन अभी तक रेलवे पारंपरिक तरीकों से करता था, जिससे वक्त भी काफी लग जाता था और समस्याएं भी बहुत आती थीं। लेकिन अब रेलवे बड़ी परियोजना के लिए एरियल लिडार तकनीक अपनाएगा। इस तकनीक का प्रयोग पहली बार दिल्ली वाराणसी हाईस्पीड रेल कॉरीडोर के जमीनी सर्वेक्षण में किया जा रहा है जो 13 दिसंबर से शुरू होगा। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक दिल्ली वाराणसी के बीच मार्ग में घनी आबादी, शहरी और ग्रामीण क्षेत्र, सड़क, नदियां खेत आदि के आने से जमीन का सर्वे कार्य मुश्किल होगा ऐसे में लिडार सर्वेक्षण तकनीक मददगार साबित होगी।
यह है तकनीक
रेल परियोजना के मार्ग का संरेखण या जमीनी सर्वेक्षण किसी भी रैखिक अवसंरचना के लिहाज से परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु होता है। नई तकनीक में परियोजना रिपोर्ट तैयार करने के लिए हेलीकाप्टर पर लेजर उपकरण लगाए जाएंगे। लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग (लिडार) तकनीक से युक्त यह उपकरण चिह्नित जमीन के आसपास के क्षेत्रों का सर्वे कर सटीक जानकारी जुटाएगा। इस तकनीक में सटीक सर्वेक्षण डेटा प्राप्त करने के लिए लेजर डेटा, जीपीएस डेटा, फ्लाइट पैरामीटर और वास्तविक तस्वीरों का उपयोग किया जाता है। सर्वेक्षण से प्राप्त जानकारी के आधार पर क्षैतिज मार्ग का संरेखण, संरचनाओं की डिजाइन, स्टेशन एवं डिपो को बनाने के स्थान, कॉरीडोर के लिए आवश्यक जमीन, परियोजना से प्रभावित होने वाले भूखंडों व संरचनाओं की पहचान करके सही रास्ता तय किया जाएगा।
18 महीनों का काम 18 सप्ताह में होगा
दिल्ली वाराणसी हाई स्पीड रेल कॉरीडोर करीब 800 किमी लंबा है। अधिकारियों के मुताबिक पारंपरिक तरीके से इस रूट का जमीन सर्वेक्षण पूरा करने में 18 महीने का समय लग जाएगा। यदि यही सर्वेक्षण लिडार तकनीक से किया गया तो यह काम महज 18 सप्ताह में ही पूरा हो जाएगा।
रक्षा मंत्रालय से हेलीकॉप्टर उड़ाने की अनुमति मिल गई है। रेलवे इंजीनियर उपकरणों का परीक्षण कर रहे हैं। मौसम सही रहा तो 13 दिसंबर से जमीनी सर्वे शुरू किया जाएगा।
अमित मालवीय, जनसंपर्क अधिकारी उत्तर मध्य रेलवे प्रयागराज मंडल
Leave a Reply