पत्रकार उपेंद्र राय सीबीआई हिरासत में, आरोप लगा जबरन 15 करोड़ रुपये की कथित वसूली, पढे़ पूरी स्टोरी

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नई दिल्ली । कथित भ्रष्टाचार और जबरन वसूली के नए मामले में लिया है। सीबीआई के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। पांच मई को दर्ज किया गया यह ताजा मामला मुंबई के एक बिल्डर से 15 करोड़ रुपये की कथित वसूली से जुड़ा है। इसमें उपेंद्र राय को हाल ही में गिरफ्तार किया गया था। सीबीआई के मुताबिक मुंबई की व्हाइट लायन रियल एस्टेट डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के निदेशकों में से एक बलविंदर सिंह मल्होत्रा ने राय के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।

इससे पहले उपेंद्र राय को हवाईअड्डा आने-जाने का पास हासिल करने में नियमों को तोड़ने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इसमें राय पर आरोप है कि उन्होंने इस काम के लिए एक विमानन कंपनी के साथ अपने संबंधों का कथित तौर पर इस्तेमाल किया। एक अधिकारी ने कहा कि राय को 16 जुलाई को विशेष सीबीआई अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा क्योंकि सोमवार को उनकी पुलिस रिमांड खत्म हो जाएगी।

उपेंद्र राय खुद को संपादक तो कहते हैं लेकिन आज तक न उन्होने कोई संपादकीय लिखा न कभी रिपोर्टर्स को कोई खास स्टोरी करने के लिए जोर दिया। वो 2019 में यूपी के बलिया से चुनाव लड़ना चाहते थे, एक टेलिविजन चैनल शुरु करना चाहते थे जिसके लिए जैन टीवी और अधिकारी ब्रदर्स के साथ उनकी सौदेबाजी जारी थी, बल्कि नोएडा में तो इसके लिए उन्होने जगह भी हासिल कर ली थी, और दिल्ली में तमाम लोगों की तरह वो भी अपना एक न्यूज पोर्टल चला ही रहे थे ।

राय दरअसल पत्रकारिता के नए ‘शो मैन’ बनने की ख्वाहिश रखते थे, वो चाहते थे कि बतौर चैनल हेड उनकी तस्वीरों वाली होर्डिंग भी दिल्ली-नोएडा के सनसनाते फ्लाईवे पर नजर आएं। लेकिन उनका ये दांव शायद उल्टा पड़ा।
राय जो लंबे वक्त से जांच एजेंसियों के राडार पर थे, उस शाम बमुश्किल कॉफी की कुछ चुस्कियां ले पाए थे कि सीबीआई के 27 अफसरों की एक जांच टीम दक्षिण दिल्ली के उनके शानदार ऑफिस-कम-रिहायशी बंगले में प्रवेश करती है। और जांच शुरु ….

वहां से बरामद कागजात के साथ एक चैंकाने वाली डायरी भी बरामद होती है, राय का कहना है कि वो डायरी बतौर पत्रकार, उन्हें उनके सूत्रों के जरिए हासिल हुई। लेकिन शायद उन्हें नहीं पता था कि इसी डायरी की एक और प्रति मुंबई में कभी एक और छापे के दौरान बरामद हो चुकी थी, जिसने एक बड़े उद्यमी घराने को थर्रा दिया था। एक ऐसा बड़ा केस जिस पर दिल्ली की अदालत में सुनवाई चल ही रही है।

राय लगातार कहते रहे कि वो पत्रकार हैं, लेकिन वो बता नहीं सके कि कौन सा संपादक इस तरह निजी हवाई जहाजों में सफर करता है, बड़े उद्यमियों को जमीनें खरीदने में मदद करता है, विशाल कॉरपोरेट घरानों के टैक्स बचाने के जुगाड़ सेट करता है। जांच करने वालों को यहां तक पता था कि राय को उस मैगजीन के मालिक ने क्यों निकाला जो खुद ही तमाम मामलों में प्रवर्तन निदेशालय के राडार पर था।

उपेंद्र राय, राजधानी दिल्ली के सत्ता के गलियारों में तमाम लोगों के लिए डॉन क्विकजोट के मशहूर किरदार के ‘सांचो पैंजा’ की तरह थे। (सांचो पैंजा एक ऐसा मामूली चरित्र है, जिसका इस्तेमाल बड़े-बड़े और गैरमामूली लोग करते हैं और वो अपने मुनाफे के मुताबिक उनकी मदद करता है या कह सकते हैं खुद को इस्तेमाल होने देता है)

तो ‘सांचो पैंजा’ राय की फेहरिश्त में राजधानी के लालची अफसरशाहों से लेकर अय्याश सियासत दान तक शामिल थे, वो जहां जाते हमेशा सहयोगियों का लव लस्कर उनके साथ साथ चलता था।

बहरहाल राय को 12 घंटे की गहन पड़ताल और लंबे सवाल-जवाब के बाद आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया। इस दौरान जो लोग उनसे मिलने पहुंचे सीबीआई ने उन्हें भी हिरासत में लेकर पूरी रात बिठाए रखा, ये रेड दिल्ली और यूपी में कुल 11 जगहों पर एक ही वक्त पड़ी और एक साथ जारी थी।

लेकिन इस पूरी कार्रवाई का सबसे अफसोसनाक पहलू ये था कि राय जांच कर्ताओं को लगातार तर्क दे रहे थे कि वो तहलका मैगजीन के चीफ एडीटर थे। किस्म-किस्म की जगहों पर जाना और किस्म-किस्म के लोगों से मिलना उनके काम का हिस्सा था। उनके पास से बरामद एयरपोर्ट के कथित ‘ऑल एक्सेस पास’ के लिए भी उनके पास यही तर्क था।

(ये ऑल एक्सेस पास जिसे तकनीकी जबान में एयरोड्रम एंट्री पास कहते हैं सिर्फ अति वीवीआईपी लोगों के पास होता जो पूरे देश में महज कुछ सौ लोग भी नहीं होंगे, या फिर एयरपोर्ट के तकनीकी स्टाफ के पास। ये उन्हें कैसे हासिल हुआ ये अब भी एक पहेली है) हालांकि तहलका के तमाम पूर्ववर्ती संपादकों के लिए ये बेहद अफसोसनाक क्षण था, और खोजी पत्रकारिता को एक नया अवतार देने वाली (trail blazer journalism) इस चर्चित मैगजीन के लिए मरणांतक आघात।

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