पंजाब निकाय चुनाव में कांग्रेस की जीत ने बढ़ाई कैप्टन-सिद्धू के बीच दूरी?, 2022 चुनाव के लिए दोनों के बीच खींचातानी शुरू

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सबकी नजरें सिद्धू पर लगी हुई थी कि वह आते हैं या नहीं। पिछले दिनों मुख्यमंत्री के साथ लंच करने के बाद दोनों के ठंडे रिश्तों में कुछ गरमाहट आने लगी थी। सिद्धू का लंच में न पहुंचना विधायकों में चर्चा का विषय बना रहा। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी हरीश रावत के मध्यस्थता करने के बाद दोनों नेताओं के रिश्ते में सुधार हुआ था। वहीं, चर्चा चल रही थी कि बजट सत्र के बाद सिद्धू को मुख्यमंत्री कैबिनेट में वापस ले सकते हैं। ऐसे में सिद्धू के लंच पर नहीं आने से भविष्य ने कुछ नए समीकरण भी बन सकते हैं। वहीं, सांसद रवनीत बिट्टू भी मंच पर नहीं पहुंचे। वह दिल्ली में धरने पर बैठे हुए हैं,जबकि कैबिनेट मंत्रियों में सुखबिंदर सिंह सरकारिया और रजिया सुल्ताना भी गैर हाजिर रहे।

सिद्धू के उल्ट कांग्रेस के राज्य सभा सदस्य प्रताप सिंह बाजवा की उपस्थिति ने कई अटकलें खड़ी कर दी हैं क्योंकि कैप्टन और बाजवा का लंबे समय से छत्तीस का आंकड़ा है। यह दोनों ही नेता एक-दूसरे पर सियासी हमला करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ते। इसके बावजूद बाजवा मुख्यमंत्री को बधाई देने के लिए पहुंचे। बाजवा की उपस्थिति से इस बात को लेकर कयास लगने लगे हैं कि क्या बाजवा कैप्टन के साथ अपने रिश्तों को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि 2022 में विधानसभा चुनाव आने वाले हैं और बाजवा के विधायक भाई फतेह जंग बाजवा को कादियां से फिर चुनाव लड़ना है।

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