नोटबंदी: कितनी हकीकत और कितना फ़साना!

नोटबंदी: कितनी हकीकत और कितना फ़साना!

 

 

बीते साल 8 नवंबर को मोदी सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए 500 और 1000 के नोटों को बैन कर दिया था. नोटबंदी के लिए कालाधन, नकली करेंसी, आतंकवाद पर रोक और कैशलेस इकोनॉमी को बढ़ावा देना बताया गया था. इस फैसले के बाद बैंकों और ATM पर लंबी लाइनें देखने को मिलीं और फ़ोर्ब्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक इससे प्रभावित 100 से ज्यादा लोगों की मौत हुई. जानिए नोटबंदी को लेकर जो दावे किए गए थे वो कितने सही थे..

1. दावा: 3 लाख करोड़ रुपए की ब्लैक मनी बर्बाद हो जाएगी.

हकीकत: वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संसद में बताया कि 1.48 लाख बैंक खातों में 1.48 लाख करोड़ रुपये जमा किए गए. हर खाते में कम से कम 80 लाख रुपये जमा किए जबकि खातों में औसत डिपोजिट 3.3 करोड़ रुपये रहा. उधर RBI के मुताबिक 99.3% पुराने नोट सिस्टम में वापस आ गए हैं. इसका मतलब कुल 15.44 लाख करोड़ रुपए में से 15.28 लाख करोड़ वापस आ गए. तो कालाधन कहां गया?

2. दावा: नोटबंदी से नकली करेंसी से मुक्ति मिलेगीहकीकत: बीते एक साल में सिस्टम में 20% नकली करेंसी बढ़ गई है. नए 2000 और 500 के भी नकली नोट पकड़े जा रहे हैं.

3. दावा: सिस्टम में कैश आएगा जिससे टैक्स कलेक्शन में इजाफा होगा

हकीकत: टैक्स जमा करने वालों की संख्या में 2% की गिरावट देखी गई. टैक्स फ़ाइल करने वालों की संख्या में 25% का इजाफा दर्ज किया गया जबकि पिछले साल ये 27% था. हालांकि टैक्स कलेक्शन 20% तक बढ़ गया.

4. दावा: डिजिटल लेनदेन बढ़ेगा

हकीकत: शुरुआत में जब तक नए नोट उपलब्ध नहीं थे इसके अच्छे नतीजे दिखे. हालांकि अप्रैल में जैसे ही बैंकों को नए नोट मिलने लगे डिजिटल लेन-देन घटने लगा. पिछले साल नवंबर महीने में 67.14 करोड़ डि‍जिटल ट्रांजेक्शन हुए थे. दिसंबर महीने में य‍ह बढ़कर 95.750 करोड़ पर पहुंच गए. हालांकि इस साल जुलाई तक यह आंकड़ा घटकर 86.23 करोड़ पर आ गए.

रिकॉर्ड्स के मुताबिक आरटीजीएस और एनईएफटी ट्रांसफर 2016-17 में क्रमश: 6 फीसदी और 20 फीसदी बढ़े हैं. हालांकि पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया के मुताबिक नोटबंदी के बाद कैशलेस लेनदेन की रफ्तार 40 से 70 फीसदी बढ़ी है.

5. दावा: इकोनॉमी को होगा फायदा

हकीकत: GDP में 2% की गिरावट दर्ज की गई. पहली तिमाही में जीडीपी वृद्ध‍ि दर घटकर 6.1 फीसदी पर आ गई. पिछले साल इसी अव‍धि के दौरान यह 7.9 फीसदी पर थी. इसके बाद अप्रैल-जून तिमाही में वृदि्ध दर और भी कम हुई और यह 5.7 फीसदी पर पहुंच गई. पिछले साल इस दौरान यह 7.1 फीसदी पर थी. इसके आलावा नए नोटों की छपाई पर 7900 करोड़ रुपए खर्च हुए जबकि पहले ये रकम 3400 करोड़ रुपए थी. पुराने नोटों को संभालने में RBI ने 17,400 करोड़ रुपए खर्च किए जबकि पहले ये खर्च सालाना 500 करोड़ रुपए था.

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