नए CJI बने रंजन गोगोई, इनके पास न car है, न house और न ही कोई Loan

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नई दिल्ली । जस्टिस गोगोई इस समय सुप्रीम कोर्ट के उन 11 न्यायाधीशों में शामिल हैं जिन्होंने अपनी संपत्ति से जुड़ी जानकारी को सार्वजनिक कर दिया है. अटर्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल ने सोमवार को जब यह कहा कि जजों की सैलरी तिगुनी होनी चाहिए तो शायद उनके दिमाग में सुप्रीम कोर्ट के जजों द्वारा संपत्ति को लेकर दिया गया घोषणापत्र रहा होगा।

खासकर विदा हो रहे सीजेआई दीपक मिश्रा और नए सीजेआई रंजन गोगोई की संपत्तियां उनके जेहन में रही होंगी। बता दें कि जस्टिस रंजन गोगोई ने बुधवार को 46वें सीजेआई (चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया यानी भारत के प्रधान न्यायाधीश) के तौर पर शपथ ली। राष्ट्रपति भवन में सुबह पौने 11 बजे के करीब उन्हें राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने शपथ दिलाई। वह सीजेआई बनने वाले पूर्वोत्तर से पहले जज हैं। उनके पिता असम के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं।

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राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने  जस्टिस रंजन गोगोई ने  को शपथ दिलाई

जब गोगोई के पिता ने की भविष्यवाणी
हाल ही में रिलीज हुई एक किताब गुवाहाटी हाईकोर्ट, इतिहास और विरासत में जस्टिस गोगोई के बारे में खघस जानकारी दी गई है।ये किताब उस किस्से का जिक्र करती है जब एक बार जस्टिस गोगोई के पिता केशब चंद्र गोगोई (असम के पूर्व मुख्यमंत्री) से उनके एक दोस्त ने पूछा कि क्या उनका बेटा भी उनकी ही तरह राजनीति में आएगा? इस सवाल पर जस्टिस गोगोई के पिता ने कहा कि उनका बेटा एक शानदार वकील है और उसके अंदर इस देश के मुख्य न्यायाधीश बनने की क्षमता है. ।

साल 2001 में, जस्टिस गोगोई को गुवाहाटी उच्च न्यायालय में एक न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया. इसके बाद 2010 में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया था.एक साल बाद, उन्हें वहां मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया और 2012 में सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में लाया गया था.वह उत्तर-पूर्व से आने वाले भारत के पहले मुख्य न्यायाधीश होंगे.डिब्रूगढ़ में बड़े होने वाले जस्टिस गोगोई ने दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़े प्रतिष्ठित सेंट स्टीफंस कॉलेज में इतिहास में स्नातक की उपाधि प्राप्त की. उसके बाद उन्होंने क़ानून के संकाय में अध्ययन किया.

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नए CJI बने रंजन गोगोई

संपत्तियां कुछ भी नहीं हैं
इससे पहले, पूर्व सीजेआई दीपक मिश्रा उच्च न्यायपालिका में स्थायी जज के तौर पर 21 सालों की सेवा के बाद रिटायर हुए। इनमें से 14 साल वह अलग-अलग हाई कोर्ट में जज रहें। दूसरी तरफ, जस्टिस गोगोई 28 फरवरी 2001 को गुवाहाटी हाई कोर्ट के जज बने थे और 23 अप्रैल 2012 को सुप्रीम कोर्ट जज के रूप में शपथ ली। हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में बतौर जज लंबे कार्यकाल के बावजूद इनकी निजी संपत्तियां मामूली ही बनी रहीं। कामयाब वरिष्ठ वकीलों के मुकाबले तो इनकी संपत्तियां कुछ भी नहीं हैं।

अगर इनके बैंक बैलेंस में जीवनभर की बचत और दूसरी संपत्तियों को एक साथ करके भी देखें तो यह तमाम वरिष्ठ वकीलों की एक दिन की कमाई से भी कम होगी। सीजेआई गोगोई के पास सोने की एक भी जूलरी नहीं है, वहीं उनकी पत्नी के पास भी जो कुछ भी जूलरी हैं, वो शादी के वक्त उनके माता-पिता, रिश्तेदारों और दोस्तों की तरफ से भेंट में दी गई हैं। पूर्व सीजेआई मिश्रा के पास सोने की 2 अंगुठियां हैं, जिन्हें वह पहनते हैं। इसके अलावा उनके पास एक गोल्ड चेन है। उनकी पत्नी के पास जस्टिस गोगोई की पत्नी के मुकाबले थोड़ी सी ज्यादा जूलरी है। जस्टिस मिश्रा और जस्टिस गोगोई दोनों के ही पास अपनी कोई व्यक्तिगत गाड़ी नहीं है। शायद इसकी वजह उन्हें मिली सरकारी गाड़ी हो।

जस्टिस गोगोई के सामने चुनौतियां
मुख्य न्यायाधीश के लिए अपना नाम घोषित होने से पहले गोयनका मेमोरियल लेक्चर के दौरान उन्होने कहा कि न्याय व्यवस्था उम्मीद की आखघ्रिी किरण है और इसे निष्पक्ष रहते हुए संस्थागत गरिमा को बनाए रखना चाहिए.।
उन्होंने कहा, इस समय न्याय व्यवस्था एक ऐसा मजदूर नहीं है जो अपने औजारों को दोष देता है. बल्कि ये एक ऐसा मजदूर है जिसके पास औजार ही नहीं हैं।
मुख्य न्यायाधीश बनने पर वो जजों की नियुक्ति करने और न्याय व्यवस्था के ढांचे में सुधार जैसे ज्वलंत मुद्दों पर काम करेंगे.।
बीते कुछ समय से भारत में जाति और संप्रदाय आधारित हिंसा देखने को मिल रही है।

सीजेआई गोगोई पर कोई कर्ज या दूसरी देनदारियां नहीं हैं। वहीं, पूर्व सीजेआई मिश्रा ने दिल्ली के मूयर विहार में एक फ्लैट खरीदने के लिए 22.5 लाख रुपये का लोन लिया है, जिसकी किस्तें वह चुका रहे हैं। मिश्रा के पास कटक में एक अन्य घर भी है, जिसे उनके हाई कोर्ट का जज बनने से एक दशक पहले बनाया गया था। जस्टिस मिश्रा और जस्टिस गोगोई दोनों ने ही 2012 में अपनी संपत्तियों की घोषणा की थी।

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पूर्व सीजेआई दीपक मिश्रा

एलआईसी पॉलिसी समेत सीजेआई गोगोई और उनकी पत्नी के पास कुल मिलाकर 30 लाख रुपये बैंक बैलेंस है। जुलाई में उन्होंने शपथपत्र में घोषणा की थी कि उन्होंने गुवाहाटी के बेलटोला में हाई कोर्ट का जज बनने से पहल ही 1999 में एक प्लॉट खरीदा था। उन्होंने अपने घोषणापत्र में बताया है कि उस प्लॉट को उन्होंने जून में 65 लाख रुपये में बेच दिया था। उन्होंने खरीदार के नाम का भी जिक्र किया है। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी मां ने जून 2015 में गुवाहाटी के नजदीक जैपोरिगोग गांव में जमीन का एक प्लॉट उनके और उनकी पत्नी के नाम ट्रांसफर किया था।

दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट के सफल वरिष्ठ वकील एक दिन में ही 50 लाख रुपये से ज्यादा कमा लेते हैं। सोमवार को सीजेआई के तौर पर मिश्रा के विदाई समारोह में जब अटर्नी जनरल वेणुगोपाल जजों की सैलरी पर बोल रहे थे तो शायद उनके दिमाग में सुप्रीम कोर्ट के जजों की एक लाख रुपये प्रति महीने की सैलरी रही हो। हालांकि जजों को सैलरी के अलावा भत्ते और शानदार आवास जैसी दूसरी अन्य सुविधाएं भी मिलती हैं। लेकिन बात अगर पैसों की करें तो जज सीनियर ऐडवोकेट्स के मुकाबले बहुत पीछे हैं।

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