द्वेषपूर्ण प्रोपेगैंडा का हिस्सा कश्मीर में कर्फ्यू की रिपोर्ट- पुलिस

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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने इस आशय की रिपोर्ट को आधारहीन प्रोपेगैंडा करार दिया जिनमें कहा जा रहा है कि अनुच्छेद 370 को रद्द किए जाने के बाद से बीते 56 दिनों से घाटी में कफ्र्यू लगा हुआ है। यहां एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने आईएएनएस से कहा, राज्य से बाहर और देश में फैलाई गई यह रिपोर्ट कि कश्मीर बीते पांच अगस्त से लगातार कफ्र्यू के तहत है, पूरी तरह से आधारहीन है। यह राष्ट्रविरोधी तत्वों द्वारा छेड़े गए द्वेषपूर्ण प्रोपेगैंडा का हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि पांच अगस्त के बाद से ऐसे कोई चार या पांच दिन ही रहे होंगे जब पुराने श्रीनगर में कुछ जगहों पर प्रदर्शन रोकने के लिए प्रतिबंध लगाया गया, अन्यथा कश्मीर में कहीं भी नागरिकों के आने-जाने पर रोक नहीं है। अफसर ने स्पष्ट किया, हां, हमने नागरिकों की जान व सार्वजनिक संपत्ति की हिफाजत के लिए शहरों व कस्बों में सुरक्षा बल तैनात किए हुए हैं।

लेकिन, इस तैनाती का कोई संबंध यातायात या लोगों के आवागमन पर किसी तरह की रोक से नहीं है। उन्होंने कहा कि उन असामाजिक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है जो दुकानदारों और ट्रांसपोर्ट मालिकों को सामान्य दिनचर्या से रोक रहे हैं। इनकी पहचान की जा रही है और इन पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि कुछ जगहों पर इन तत्वों ने गुजर रहे वाहनों पर पत्थर फेंके हैं।

अधिकारी ने कहा, इन उकसावों के बावजूद निजी वाहन पांच अगस्त के बाद से बिना किसी रोकटोक घाटी में आ-जा रहे हैं। कुछ घटनाओं को छोडक़र, अंतरजिला सार्वजनिक परिवहन घाटी में शुरू हो चुका है जबकि श्रीनगर-जम्मू के बीच सार्वजनिक परिवहन पर एक दिन के लिए भी असर नहीं पड़ा है।

इस बात से भी इनकार किया गया है कि घाटी में शिशु आहार, दवा, खाने-पीने के सामान, पेट्रोल-डीजल-रसोई गैस की कोई किल्लत है। अधिकारी ने कहा कि लैंडलाइन फोन कश्मीर में पूरी तरह से काम रहे हैं। हां, मोबाइल फोन और इंटरनेट सेवा अभी निलंबित है। यह पूछने पर कि मोबाइल फोन सेवा कब बहाल होगी, अधिकारी ने कहा कि उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा और हंदवाड़ा में इन्हें चालू कर दिया गया है। घाटी में दो-तीन दिन में इन्हें चरणबद्ध तरीके से चालू कर दिया जाएगा।

 

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