नई दिल्ली। देश में पिछले कुछ दिनों से कोरोना वायरस के मामले बहुत तेजी से बढ़े हैं। नए मामलों में सबसे बड़ी तादाद तबलीगी जमात के मुख्यालय निजामुद्दीन मरकज में पिछले महीने हुए जलसे में शामिल हुए लोगों की है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक पिछले 2 दिनों में ही तबलीगी जमात से जुड़े 647 लोगों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि को चुकी है। ये केस देश के 14 राज्यों में सामने आए आए हैं। पिछले 2-3 दिनों से देश में कोरोना के जितने नए केस सामने आ रहे हैं, उनमें आधे से ज्यादा मामले मरकज से जुड़े हुए हैं।
गुरुवार को रात पौने 12 बजे तक देशभर में कोरोना वायरस के कुल 485 नए मामलों की पुष्टि हुई थी। इनमें से कम से कम 295 केस उन लोगों के थे, जिन्होंने निजामुद्दीन मरकज में हुए जलसे में शिरकत की थी। यानी करीब 65 प्रतिशत नए केसों का स्रोत तबलीगी जमात का जलसा है।
गुरुवार तक दिल्ली में कुल 293 केस थे जिनमें से अकेले मरकज से जुड़े मामले 182 थे। पिछले 24 घंटे में सिर्फ दिल्ली में मरकज से जुड़े 3 लोगों की मौत हो चुकी है। देश में कोरोना से अब तक 56 लोगों की मौत हो चुकी है, इनमें से कम से कम 20 मौतें तबलीगी जमात से जुड़े लोगों की हुई है।
भारत में कोरोना वायरस के आंकड़ों में इस तेजी के लिए बहुत हद तक तबलीगी जमात की लापरवाही जिम्मेदार है। निजामुद्दीन मरकज का मामला जैसे ही खुला, कोरोना वायरस के मामले तेजी से बढ़ने लगे। मध्य मार्च में मरकज में हुए मजहबी जलसे में देश-विदेश से करीब 8 से 9 हजार लोग शामिल हुए थे। जमात की लापरवाही कितनी भारी पड़ी है, इसका अंदाजा आप भारत में कोरोना वायरस केसों के ट्रेंड से लगा सकते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम जारी अपने वीडियो मेसेज में देशवासियों से 5 अप्रैल, रविवार को रात नौ बजे घरों सारी बत्तियां बुझाकर 9 मिनट के लिए मोमबत्ती, दिया, टॉर्च या मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाने का आग्रह किया।
28 दिन में 3 से हजार पहुंचा आंकड़ा, सिर्फ 4 दिनों में 2000 पार
पिछले महीने की शुरुआत यानी 1 मार्च तक देश में कोरोना वायरस से संक्रमितों की संख्या महज 3 थी। 14 मार्च तक यह आंकड़ा बढ़कर 100 हुआ। 24 मार्च को इस आंकड़े ने 500 को पार किया और 29 मार्च को हजार का आंकड़ा छुआ था। तब तक तबलीगी जमात की लापरवाही का खुलासा हो चुका था।
इसके बाद देश के तमाम राज्यों में जगह-जगह निजामुद्दीन मरकज में हुए जलसे में शामिल होने वाले लोगों की तलाश और जांच का सिलसिला शुरू हुआ। इसके साथ ही कोरोना केसों का जैसे विस्फोट होने लगा। 1 मार्च को 3 केस के बाद अगले 28 दिनों में यह आंकड़ा 1000 पहुंचा था, लेकिन यहां से इसे 2000 पहुंचने में महज 4 दिन लगे।
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