देश के महत्वपूर्ण संस्थानों की कमान ‘लकी क्लास ऑफ 84’ के अफसरों हाथों में

देश के महत्वपूर्ण संस्थानों की कमान ‘लकी क्लास ऑफ 84’ के अफसरों हाथों में

नई दिल्ली ।1984 बैच के असम-मेघालय काडर के अधिकारी वाईसी मोदी को सितंबर में राष्ट्रीय जांच एजेंसी का महानिदेशक नियुक्त किया गया। इसके बाद कई अन्य अधिकारी नियुक्त हुए, जो 1984 बैच के ही थे। अब इन अधिकारियों को ‘लकी क्लास ऑफ 84’ कहा जा रहा है। इस बैच के अधिकारी काफी भाग्यशाली हैं कि सरकार ने उनपर विश्वास जताते हुए पुलिस अधिकारियों के लिए हाई प्रोफाइल माने जाने वाले पदों पर नियुक्त किया है।

इंटेलिजेंस ब्यूरो और रॉ के नए मुखिया की नियुक्ति हुई। ये दोनों ही 1984 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे हैं।   1984 बैच के आईपीएस अधिकारी 6 और मुख्य एजेंसियों-एनआईए, बीएसएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी, एनएसजी और ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी की कमान संभाल रहे हैं। इस बैच के बहुत से अधिकारी राज्य के डीजीपी, केंद्र में डीजीपी या डीजीपी के बराबर पद पर काबिज हैं।इनमें से ज्यादातर अधिकारियों को संबंधित बलों और एजेंसियों में डीजीपी के तौर पर तैनात किया गया है।

यह सिलसिला 2017 में शुरू हुआ, जब 1984 बैच के असम-मेघालय कैडर के अधिकारी वाईसी मोदी को सितंबर में राष्ट्रीय जांच एजेंसी का महानिदेशक नियुक्त किया गया। इसके बाद कई अन्य अधिकारी नियुक्त हुए, जो 1984 बैच के ही थे। अब इन अधिकारियों को ‘लकी क्लास ऑफ 84’ कहा जा रहा है। वाईसी मोदी के बाद जनवरी, 2018 में तेलंगाना काडर के सुदीप लखाटिया को नैशनल सिक्यॉरिटी गार्ड का महानिदेशक बनाया गया।

इसके 3 महीने बाद ही बिहार काडर के अधिकारी राजेश रंजन को अप्रैल, 2018 में सीआईएसएफ का महानिदेशक बनाया गया। सीआईएसएफ के चीफ बनने से पहले वह बीएसएफ में विशेष महानिदेशक थे।रजनीकांत मिश्रा से अस्थाना तक ‘लकी बैच 1984’ यह सिलसिला आगे भी जारी रहा और 5 महीने बाद 1984 बैच के यूपी कैडर के अधिकारी रजनीकांत मिश्रा को बीएसएफ नियुक्त किया गया।

मिश्रा के बाद हरियाणा काडर के अधिकारी एस.एस. देशवाल को इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस का चीफ बनाया गया। आईटीबीपी के मुखिया बनने से पहले देशवाल सीमा सुरक्षा बल के चीफ थे। जनवरी में गुजरात काडर के अधिकारी राकेश अस्थाना को उड्डयन सुरक्षा निदेशालय का महानिदेशक नियुक्त किया गया। 1984 बैच के अफसरों का यह ‘लक’ बुधवार को एक बार फिर नजर आया, जब पीएम मोदी ने सामंत गोयल को रॉ का चीफ बनाया और उनके ही बैचमेट अरविंद कुमार को आईबी का निदेशक नियुक्त किया।

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