देश के नाम एक और उपलब्धि : रामसार आर्द्रभूमि की सूची में शामिल की गई लद्दाख की ‘स्तार्तासापुक सो’ और ‘सो कर’ झीलें

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नई दिल्ली, पीटीआइ। देश के नाम एक और उपलब्धि हासिल हुई है। समाचार एजेंसी पीटीआइ की रिपोर्ट के मुताबिक रामसार प्रस्ताव संधि (Ramsar Convention) के तहत अंतरराष्ट्रीय महत्व के स्थलों की सूची में देश की एक और आर्द्रभूमि को शामिल की गई है। इसके साथ ही अब देश में इस प्रकार की आर्द्रभूमि की संख्या 42 हो गई है। दक्षिण एशिया में भारत में आर्द्रभूमि की संख्या सर्वाधिक है। लद्दाख में मौजूद आपस में जुड़ी हुई दो झीलों ‘स्तार्तासापुक सो’ (Startsapuk Tso) और ‘सो कर’ (Tso Kar) को आर्द्रभूमि की सूचि में शामिल किया गया है।

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देश के नाम एक और उपलब्धि हासिल हुई है। रामसार प्रस्ताव संधि (Ramsar Convention) के तहत अंतरराष्ट्रीय महत्व के स्थलों की सूची में देश की एक और आर्द्रभूमि को शामिल की गई है। इसके साथ ही अब देश में इस प्रकार की आर्द्रभूमि की संख्या 42 हो गई है।

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर (Prakash Javadekar) ने ट्वीट कर बताया कि ये झीले लद्दाख के चांगथांग क्षेत्र में मौजूद हैं। इनको अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि की सूची में शामिल किया गया है। गौर करने वाली बात यह है कि ‘स्तार्तासापुक सो’ (Startsapuk Tso) झील का पानी मीठा है और ‘सो कर’ (Tso Kar) का पानी खारा है जबकि ये दोनों झीलें आपस में जुड़ी हुई हैं। इसके साथ ही भारत में रामसार स्थलों की संख्‍या 42 हो गई है। पिछले महीने महाराष्ट्र की लोनार झील (Lonar lake in Maharashtra) और आगरा की सुर सरोवर झील (Sur Sarovar Lake) को इस सूची में जगह दी गई थी।

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