नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली में प्रदूषण के बढ़ते खतरनाक स्तर को देखते हुए केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने दो दिन तक औद्योगिक और निर्माण गतिविधियों पर रोक लगा दी है। राजधानी दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक रविवार को 450 के बेहद गंभीर स्तर को पार कर गया था और आज यह मामूली सुधार के साथ 448 पर रहो। इसे देखते हुए सीपीसीबी ने कई कड़े कदम उठाए हैं। सीपीसीबी के अध्यक्ष एस पी सिंह परिहार ने कहा कि राजधानी तथा आस पास के इलाकों में बुधवार तक किसी भी तरह की औद्योगिक तथा निर्माण गतिविधि की इजाजत नहीं होगी।
उन्होंने कहा कि नियमों का पालन नहीं करने के लिए सार्वजनिक तेल वितरण कंपनियों इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिन्दुस्तान पेट्रोलियम पर एक-एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। रविवार से समूचा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र गंभीर प्रदूषण की चपेट में है। गाजियाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक सर्वाधिक 478, नोएडा में 457 , फरीदाबाद में 444 तथा गुरूग्राम में 306 के स्तर तक पहुंच गया।
परिहार ने बताया कि इस साल प्रदूषण नियंत्रण के लिए सीपीसीबी तथा स्थानीय निकायों एवं अन्य एजेंसियों ने अच्छा काम किया है। समीर ऐप के माध्यम से 01 नवंबर से अब तक प्रदूषण फैलाने की 7,600 शिकायतें मिली हैं जिनमें 5,600 यानी करीब 74 प्रतिशत पर शिकायतों का समाधान किया जा चुका है। इनमें सबसे ज्यादा शिकायतें कूड़े को लेकर मिली थीं। उन्होंने बताया कि प्रदूषण फैलाने वालों पर जुर्माने के अलावा प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।
दिल्ली मेट्रो तथा केंद्रीय लोक निर्माण विभाग को भी नोटिस दिए गए हैं। मिश्रा ने कहा कि आम तौर पर जाड़े के मौसम में आग ज्यादा जलाई जाती है। इसमें खेतों में पराली जलाना और अलाव के लिए आग जलाना भी शामिल है। इस मौसम में हवा में आद्र्रता ज्यादा होने और हवा की रफ्तार कम रहने से प्रदूषक तत्त्व कम ऊंचाई तक ही एकत्र होते रहते हैं। रविवार से समूचा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र गंभीर प्रदूषण की चपेट में है। बुधवार को गाजियाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक सर्वाधिक 478, नोएडा में 457, फरीदाबाद में 444 तथा गुरुग्राम में 306 के स्तर तक पहुँच गया।
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