नई दिल्ली। एक चौकीदार का काम है अपनी जिम्मेदारी का ईमानदारी पूर्वक निर्वाह करना। यानि चौकीदार का काम है चौकीदारी को पूरी ईमानदारी के साथ करना। लेकिन यदि चौकीदार दूसरे कामों में लग जाए या लगा दिया जाए तो फिर वह अपना काम कैसे करेगा…? फिर तो उस जगह पर सेंधमारी होना तय है, यानि चौकीदार लापरवाह है। अब आप सोच रहें होंगे कि हम यह कौन सी बातें कह रहे हैं।
तो आइए हम आपको माजरे को तफ्तीस से समझाते हैं। इन दिनों देश में जितना चौकीदार और चौकीदारी की चर्चा है उतना बेरोजगारी, गरीबी, भुखमरी, अपराध और विकास की चर्चा नहीं हो रही है। चाहे वह सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी हो या उसके विरोधी सभी चौकीदार और चौकीदारी की चर्चा करने में जुटे हुए हैं।
कल यानि 8 अप्रैल 2019 को भारतीय जनता पार्टी के कार्यालय में जब एक चौकीदार दूसरे चौकीदार (प्रधानमंत्री मोदी जो कहते हैं मैं भी चौकीदारी हूं) की कटआउट सजाने में लगा दिखा तो सवाल उठ खड़ा हुआ कि यदि चौकीदार दूसरे की सेवा करने में लगेगा तो फिर वह अपने दायित्व का कैसे निभाएगा।
एक चौकीदार की जिम्मेवारी होती है कि वह जहां भी लगाया गया है यानि जिस भी चीज, वस्तु अथवा जगह की रखवाली की जिम्मेदारी दी गयी है वह उसकी सुरक्षा पूरी ईमानदारी से करे जिससे कोई भी वहां सेंध न लगा सके। यदि चौकीदार चौकीदारी को छोड़कर अन्य काम में लगेगा तो फिर अपने मुख्य काम को कैसे अंजाम देगा। यही बात हर उस शख्स पर लागू होगी जो समाज में अलग-अलग जिम्मेदारियां निभा रहे हैं।
मसलन अध्यापक यदि शिक्षा देने को छोड़कर अन्य काम में लग जाए तो वह शिक्षक कैसे कहलाएगा। इसी तरह ड्राइवर यदि गाड़ी चलाते समय कूद जाए तो गाड़ी खड्ड में तो गिरेगी ही। गाड़ी में जो सवार होगा वह भी कहीं का नहीं रहेगा। इसी तरह देश का मुखिया यानि प्रधानमंत्री यदि अपने को चौकीदार तक सीमित करेगा जो सुनने में भी हस्यास्पद लगता है तो वह देश का नेतृत्व कैसे करेगा।
भारतीय समाज में हर किसी को अलग-अलग जिम्मेदारियों से बाधा गया है और वह उसी में शोभित भी होता है। तभी देश और समाज का तानाबाना और जो अलग-अलग व्यवस्थाएं दी गयी हैं तभी चलती हैं। एक दूसरे में दखलनदाजी देने और करने से संचालित व्यवस्थाएं बाधित हो जाती हैं खत्म हो जाती है।
जैसे की भाजपा मुख्यालय में एक सिक्योरिटी गार्ड को उसकी जिम्मेदारी से हटाकर मोदी के कटआउट लगाने में लगा दिया जाता है। यदि जिस जगह की सुरक्षा की जिम्मेदारी उसे दी गयी है यदि वहां पर उस दौरान कुछ घटित होता है तो उसके लिए कौन जिम्मेदार होगा यह एक वाजिब सवाल है जिसका उठना लाजिमी है, इसलिए हर वह शख्स उसी रुप में ठीक लगता है जिस रूप में उसे जिम्मेदारी दी गयी होती है।
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