चुनावी तैयारी में लघु और मध्यम अखबारों पर मोदी सरकार का मलहम ?

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने लघु और मध्यम अखबारों को सहूलियत देते हुए एक नई दिशा निर्देश जारी किया है। जिसके अंगर्तगत दैनिक और साप्ताहिक अखबार को प्रकाशित करने वाले प्रकाशक डीएवीपी में संबंद्ध होने के लिए नया आवेदन दे सकते हैं। इसमें नए आवेदन देने के लिए समय सीमा 1 जुलाई 2018 से 31 जुलाई 2018 निर्धारित की गयी है।

इसमें नयी बात यह है कि नये आवेदन की पहली की तिथि जहां एक अगस्त होती थी सरकार ने उसे एक जुलाई कर दी है। इस नयी दिशा निर्देश से लघु और मध्यम समाचार मालिकों/प्रकाशकों को बड़ी सहूलियत मिलने की उम्मीद है। सवाल उठता है कि मोदी सरकार पिछले लगभग चार साल से जहां लघु और मध्यम समाचार प्रकाशकों की कमर तोड़ रखी थी उन पर अचानक इतनी बड़ी रहम क्यों कर रही है?

जानकार मानते हैं कि इस सबके पीछे 2019 का चुनाव है जो महज कुछ महीने ही बचा हुआ है। मोदी राज में पिछले चार साल से लघु और मध्यम अखबारों को सरकारी मिलने वाले विज्ञापनों पर लगभग एक तरह से पाबंदी लग चुकी थी। इसके लिए सरकार तमाम अपने तर्क दे रही थी। लेकिन इन अखबारों के प्रकाशकों ने इसे मोदी सरकार की दमन वाली नीति करार दी थी।

अब चूंकि 2019 का लोकसभा का चुनाव सर पर है और सरकार लगभग चुनावी मोड पर आ चुकी है। जून बीत चुका है। 2018 का महज सिर्फ छह महीने बचे हैं। उम्मीद है कि फरवरी में चुनाव आचार संघिता लागू हो जाएगा। यानि सरकार पास अब समय नहीं बचा है

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