New Delhi : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार 21 जून को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत और तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ लद्दाख में हालात पर उच्चस्तरीय बैठक की। न्यूज एजेंसी को सूत्रों ने रक्षामंत्री की बैठक के बाद बताया – सशस्त्र बलों को वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीन की सेना के किसी भी प्रकार के आक्रामक रवैये से निपटने के लिये पूरी स्वतंत्रता दी गई है।
इसके अलावा भारतीय बलों को पूर्वी लद्दाख और अन्य सेक्टरों में चीन के किसी भी दुस्साहस का मुंह तोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह से तैयार रहने को कहा गया है।
सूत्रों के अनुसार, चीन के साथ लगती सीमा की रक्षा के लिए भारत अब से अलग सामरिक तरीके अपनाएगा।
सूत्रों ने न्यूज एजेंसी को बताया कि शीर्ष सैन्य अधिकारियों को जमीनी सीमा, हवाई क्षेत्र और रणनीतिक समुद्री मार्गों में चीन की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिये गये हैं।
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शुक्रवार को सर्वदलीय बैठक में राजनीतिक दलों से कहा था कि सेनाओं को यथोचित कार्रवाई के लिए पूरी छूट दी गई है। उन्होंने कहा- हमारी सेनाएं, सीमाओं की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम हैं। भारत, शांति और मित्रता चाहता है, लेकिन अपनी संप्रभुता की रक्षा हमारे लिये सर्वोपरि है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था – ऐसे में, हमने जहां एक तरफ सेना को अपने स्तर पर उचित कदम उठाने की छूट दी है, वहीं दूसरी तरफ डिप्लोमैटिक माध्यमों से भी चीन को अपनी बात दो टूक स्पष्ट कर दी है।
वहीं, भारत-चीन के बीच बढ़ते सीमा पर तनाव को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी बयान दिया। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका भारत और चीन के बीच हाल ही में सीमा पर हुईं हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के बीच जारी संघर्ष के समाधान में सहायता करने के लिये तैयार है।
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