गुजरात में भाजपा को झटका, इस नेता ने दिया त्यागपत्र
मुख्यमंत्री विजय रूपानी द्वारा नियुक्त संसदीय सचिवों में से एक सोलंकी ने पद से इस्तीफा दे दिया. संसदीय सचिवों को उप मुख्यमंत्री के बराबर समझा जाता है और माना जाता है कि वे मंत्रियों की मदद करते हैं.
दलित नेता ने कहा कि पार्टी ने जब उन्हें बताया कि इस बार मुझे टिकट नहीं दी जायेगी तो मुझे ‘निराशा’ हुई थी. उन्होंने कहा कि मैंने एक विधायक और संसदीय सचिव के तौर पर भाजपा से इस्तीफा दे दिया है. मैंने पार्टी छोड़ने का फैसला कर लिया है क्योंकि पार्टी ने मेरी बातों को सुनना बंद कर दिया है. सोलंकी ने बताया कि पार्टी ने उन्हें सूचित किया था कि इस बार उन्हें कोई टिकट नहीं दिया जायेगा.
उन्होंने कहा, जी हां, पार्टी ने मुझे बताया था कि इस बार मुझे टिकट नहीं दी जायेगी. पार्टी ने मुझे इस्तीफा नहीं देने के लिये मनाने की कोशिश की थी लेकिन मैंने अपना इस्तीफा वापस नहीं लेने का फैसला किया है.उना दलित अत्याचार मामले का हवाला देते हुए सोलंकी ने कहा, ‘भाजपा के इस शासन में दलित समुदाय ने कई अत्याचार का सामना किया है. समुदाय कठिन स्थिति का सामना कर रहा है.’
सोलंकी ने कहा, ‘उना घटना के दौरान इससे पहले आनंदीबेन पटेल के शासन में कुछ कदम उठाये गये थे लेकिन विजय रूपानी के मुख्यमंत्री बनने पर उनकी सरकार ने दलितों के उत्थान के लिये कोई कदम नहीं उठाया.’
बहरहाल सोलंकी ने इस बात का जवाब देने से इनकार कर दिया कि वह निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ेंगे या किसी अन्य पार्टी में शामिल होंगे. सोलंकी के इस्तीफे पर भाजपा से किसी ने टिप्पणी नहीं की.
इस बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता आई के जडेजा को वाधवान सीट से टिकट नहीं दिये जाने के कारण उनके समर्थकों ने गांधीनगर में भाजपा मुख्यालय पर हंगामा किया. भाजपा ने इस सीट से धनजी भाई पटेल को टिकट दिया है.
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