गुजरात चुनाव: राहुल नहीं, मोदी-शाह की साख दांव पर

गुजरात चुनाव: राहुल नहीं, मोदी-शाह की साख दांव पर

 

 

गुजरात के दक्षिण इलाके के दौरे का आखिरी दिन आते-आते राहुल के तेवर और स्क्रिप्ट दोनों बदल गए हैं. जो राहुल पिछले चुनाव तक मनमोहन सरकार की गलती पर सफाई देते थे अब वो पिछली बात नहीं करते बल्कि अब वो बात सिर्फ मोदी सरकार की गलतियों की करते हैं.

राहुल को ये ज्ञान गीता से मिला है. राहुल उसी अंदाज में कहते भी हैं कि हमें अपना काम करना है. फल की चिन्ता नहीं करनी और पीछे नहीं देखना. राहुल मोदी सरकार से फिल्मी संवाद भी कहते हैं कि तुम्हारे पास ताकत है, सरकार है, पुलिस है पर मेरे पास सच है.

ये राहुल की नई भाषा और स्क्रिप्ट है जो नए इतिहास की इबारत लिखना चाहती है. राहुल ने युवाओं की नब्ज पर हाथ भी रख दिया. हार्दिक पटेल पाटीदार युवा को साथ ले रहे हैं तो जिग्नेश मेवाणी के साथ दलित हैं और अल्पेश ठाकोर भी आ गए हैं. ये युवा सड़क और राहुल की रैली में दिख भी रहे हैं.

अल्पेश साफ कहते हैं कि बीजेपी सुनने को तैयार नहीं क्या करें? कांग्रेस सुन रही है. पटेल भी ये मानते हैं. दूसरी ओर राहुल अब खुद गुस्सा नहीं होते और ये दूसरों के गुस्से को हवा दे रही बीजेपी के लिए सही संकेत नहीं है.राहुल को लगने भी लगा है खोने को कुछ नहीं है. गुजरात जीते तो दिल्ली दूर नहीं. दांव पर तो मोदी और शाह की साख है इसलिए राहुल अब पिच पर खुलकर खेल रहे हैं.

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