गुजरात चुनाव: जब 15 किलो सिक्के लेकर नामांकन के लिए पहुंचा प्रत्याशी
बता दें कि नामांकन के समय कैंडिडेट को कैश या रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) से बना ड्राफ्ट डिपॉजिट करना होता है.
नवसारी विधानसभा से निर्दल प्रत्याशी ने रिटर्निंग अफसर से मांग की है कि उसका पेमेंट चेक से स्वीकार किया जाए. इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैशलेस इकॉनमी का हवाला दिया. वहीं, जलालपुर से बीएसपी के कैंडिडेट 5000 रुपये फुटकर के रूप में जमा करना चाहते थे.
मंगलवार को निर्दल प्रत्याशी क्रुतिका वैद्य नामांकन फाइल करने पहुंचे. इस दौरान जब रिटर्निंग अफसर ने उनसे डिपॉजिट जमा करने को कहा तो उन्होंने चेक दे दिया. इस पर दोनों में बहस शुरू हो गई. रिटर्निंग अफसर ने नामांकन को स्वीकार करने से इनकार कर दिया. उन्होंने वैद्य को कहा कि वह डिपॉजिट चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक ही जमा करें.जब रिटर्निंग अफसर ने इस पर सहूलियत देने से इनकार कर दिया तो वैद्य के वकील कुनुभाई सुखड़िया बात को आगे कैशलेस ट्रांजेक्शन की तरफ ले गए. इस दौरान अफसर और वकील के बीच तीखी झड़प शुरू हो गई. इसके बाद वकील को नामांकन की जगह से लगभग बाहर कर दिया गया. हालांकि, मामला बढ़ता देख प्रत्याशी ने कैश जमाकर स्थिति संभाल ली.
सुखड़िया ने कहा, आज हम कैशलेस इकॉनमी की बात कर रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं कि यह सरकार की प्राथमिकता है. इसे ही देखते हुए वैद्य चेक से डिपॉजिट जमा करना चाह रहे थे. लेकिन रिटर्निंग अफसर ने इसे स्वीकार करने से मना कर दिया. नरेंद्र मोदी ने कैशलेस इकॉनमी का नारा दिया है, लेकिन जमीन पर अधिकारी इसे फॉलो नहीं कर रहे हैं.
दूसरी तरफ जलालपुर विधानसभा से बहुजन समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार गुनवंत राठौर ने कैशलेस इकॉनमी का अलग ही तरीके से विरोध किया. सरकार की तरफ से कैशलेस इकॉनमी के लिए दबाव डाले जाने पर राठौर पांच हजार रुपये का फुटकर लेकर पहुंचे.
राठौर के पास 1 रु, 2 रु और 5 रु के सिक्के थे. सभी सिक्कों का वजन 15 किलोग्राम था. तकनीकी तौर पर राठौर गलत नहीं थे, क्योंकि वह कैश में पेमेंट कर रहे थे. इसलिए उनका नामांकन वैध करार दिया गया. हालांकि, रिटर्निंग अफसर को उनके दिए पैसे को गिनने के लिए अलग से स्टाफ लगाना पड़ा.
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