क्या केजरीवाल ने कोरोना पर दिल्लीवालों को अंधेरे में रखा और मौत के आँकड़े छुपाये ?

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नई दिल्ली। दिल्ली में आखिरकार कोरोना से संक्रमित कितने मरीजों की मौत हुई है? क्या सरकार आंकड़े छिपा रही है? यह सवाल एक बार फिर उठ खड़ा हुआ है। अब इस मामले पर राजनीति गरमा रही है। दिल्ली के तीन नगर निगमों ने दिल्ली सरकार से इतर आंकड़े पेश कर विवाद को हवा दे दी है। नॉर्थ दिल्ली नगर निगम की स्टैंडिंग कमिटी के चेयरमैन जय प्रकाश ने दावा किया है कि कोरोना वायरस से मरने वालों का दिल्ली सरकार का आंकड़ा सही नहीं है। उन्होंने कहा कि 10 जून तक दिल्ली में 2,098 कोरोना पीड़ितों के शवों का अंतिम संस्कार किया जा चुका है।

वहीं, दिल्ली सरकार के मुताबिक, 11 जून को सुबह 8 बजे तक महज 984 कोविड-19 मरीजों की मौत हुई है। उधर, अकाली दल के प्रवक्ता और दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी के अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा ने श्मशान घाट का वीडियो ट्वीट कर केजरीवाल सरकार पर झूठ बोलने का आरोप लगाया है।

 2,098 शव जलाए/दफनाए गए: MCD
नॉर्थ दिल्ली नगर निगम की स्टैंडिंग कमिटी के चेयरमैन जय प्रकाश ने कहा, ‘दिल्ली के तीनों नगर निगमों के अंदर मार्च महीने से 10 जून तक का कोरोना से मौत का जो आंकड़ा आया है, वह 2098 है। करीब 2,098 शवों को हमने श्मशान घाटों में जलाया या कब्रिस्तानों में दफनाया है। लगभग 200 शवों के बारे में संदेह था कि वो कोरोना पॉजिटिव थे या नहीं।’

जय प्रकाश ने बताया, ‘दिल्ली सरकार ने 16 मई को तीनों निगमों को नोटिस देकर कहा कि सरकार और निगम के आंकड़े अलग-अलग हैं। इस पर हमने जांच कर 17 मई को सरकार को जवाब दिया था। तब भी 230 कोरोना पॉजिटिव थे और 100 संदिग्ध थे। यानी, तब भी दिल्ली सरकार के आंकड़े से निगम के आंकड़े डबल थे। तब से अब तक आंकड़ा बहुत बढ़ गया है।’

जय प्रकाश ने बताया, ‘दिल्ली सरकार ने 16 मई को तीनों निगमों को नोटिस देकर कहा कि सरकार और निगम के आंकड़े अलग-अलग हैं। इस पर हमने जांच कर 17 मई को सरकार को जवाब दिया था। तब भी 230 कोरोना पॉजिटिव थे और 100 संदिग्ध थे। यानी, तब भी दिल्ली सरकार के आंकड़े से निगम के आंकड़े डबल थे। तब से अब तक आंकड़ा बहुत बढ़ गया है।’

बैकफुट पर आई दिल्ली सरकार
एमसीडी के आंकड़े सामने आने पर दिल्ली सरकार ने सफाई पेश करते हुए कहा कि कोरोना से होने वाली मृत्यु के आकलन के लिए वरिष्ठ डॉक्टर्स की एक डेथ ऑडिट कमिटी बनाई गई है जो निष्पक्ष तरीके से अपना काम कर रही है। माननीय दिल्ली हाइ कोर्ट ने भी कमिटी को सही ठहराते हुए कहा था कि कमिटी के काम करने के तरीके पर सवाल नहीं उठाया जा सकता। हमारा मानना है कि कोरोना से किसी की भी मौत नहीं होनी चाहिए, हमें मिलकर एकजुट होकर लोगों की जान बचानी है। ये वक्त आरोप-प्रत्यारोप का नहीं है, हम सबको मिलकर इस महामारी से लड़ना है और ये सुनिश्चत करना है कि कोरोना से एक भी मौत ना हो।

बैकफुट पर आई दिल्ली सरकार
एमसीडी के आंकड़े सामने आने पर दिल्ली सरकार ने सफाई पेश करते हुए कहा कि कोरोना से होने वाली मृत्यु के आकलन के लिए वरिष्ठ डॉक्टर्स की एक डेथ ऑडिट कमिटी बनाई गई है जो निष्पक्ष तरीके से अपना काम कर रही है। माननीय दिल्ली हाइ कोर्ट ने भी कमिटी को सही ठहराते हुए कहा था कि कमिटी के काम करने के तरीके पर सवाल नहीं उठाया जा सकता। हमारा मानना है कि कोरोना से किसी की भी मौत नहीं होनी चाहिए, हमें मिलकर एकजुट होकर लोगों की जान बचानी है। ये वक्त आरोप-प्रत्यारोप का नहीं है, हम सबको मिलकर इस महामारी से लड़ना है और ये सुनिश्चत करना है कि कोरोना से एक भी मौत ना हो।

जय प्रकाश ने बताया, ‘दिल्ली सरकार ने 16 मई को तीनों निगमों को नोटिस देकर कहा कि सरकार और निगम के आंकड़े अलग-अलग हैं। इस पर हमने जांच कर 17 मई को सरकार को जवाब दिया था। तब भी 230 कोरोना पॉजिटिव थे और 100 संदिग्ध थे। यानी, तब भी दिल्ली सरकार के आंकड़े से निगम के आंकड़े डबल थे। तब से अब तक आंकड़ा बहुत बढ़ गया है।’

 

बैकफुट पर आई दिल्ली सरकार
एमसीडी के आंकड़े सामने आने पर दिल्ली सरकार ने सफाई पेश करते हुए कहा कि कोरोना से होने वाली मृत्यु के आकलन के लिए वरिष्ठ डॉक्टर्स की एक डेथ ऑडिट कमिटी बनाई गई है जो निष्पक्ष तरीके से अपना काम कर रही है। माननीय दिल्ली हाइ कोर्ट ने भी कमिटी को सही ठहराते हुए कहा था कि कमिटी के काम करने के तरीके पर सवाल नहीं उठाया जा सकता। हमारा मानना है कि कोरोना से किसी की भी मौत नहीं होनी चाहिए, हमें मिलकर एकजुट होकर लोगों की जान बचानी है। ये वक्त आरोप-प्रत्यारोप का नहीं है, हम सबको मिलकर इस महामारी से लड़ना है और ये सुनिश्चत करना है कि कोरोना से एक भी मौत ना हो।

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