तिरुवनंतपुरम। केरल विधानसभा में बुधवार को जबरदस्त हंगामा देखने को मिला। नाराज विपक्षी विधायक अध्यक्ष के आसन के पास पहुंच गए और उन्हें सदन की कार्यवाही कुछ देर के लिए रोकने पर मजबूर कर दिया। विपक्ष प्रश्नकाल की शुरुआत से ही नाराज था, क्योंकि वे मंगलवार को अपने सहयोगी और कांग्रेस विधायक शफी परमबील की पुलिस द्वारा की गई पिटाई को लेकर सदन में चर्चा की मांग कर रहे थे।
परमबील जब विधानसभा के बाहर प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस की छात्र शाखा, केरल स्टूडेंट्स यूनियन (केएसयू) के कार्यकर्ताओं को शांत करने की कोशिश कर रहे थे, तब वे पुलिस के निशाने पर आ गए थे। विपक्ष ने इस मुद्दे को पहले उठाने की मांग करते हुए परमबील के खून से सने कपड़े दिखाए। लेकिन अध्यक्ष पी. श्रीरामकृष्णन ने कहा कि वे शून्यकाल के दौरान उन्हें इसके लिए समय देंगे, जिसे विपक्ष ने मानने से इनकार कर दिया और नारेबाजी शुरू कर दी, लेकिन प्रश्नकाल आगे बढ़ा।
शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए, कांग्रेस विधायक वी.टी. बलराम ने कहा कि उनके सहयोगी को पुलिस द्वारा यह जानने के बाद भी बुरी तरह से पीटा गया कि वे एक विधायक हैं और केवल उग्र केएसयू कार्यकर्ताओं को शांत कराने की कोशिश कर रहे थे। बलराम ने कहा, पुलिस अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाना चाहिए।
विपक्ष के नेता रमेश चेन्निथला ने कहा, यह स्पष्ट रूप से विजयन के नेतृत्व में केरल पुलिस के रवैये को दर्शाता है। उनकी पुलिस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पुलिस एक ही है और उन्हें उन सभी को निशाना बनाने के लिए कहा जाता है, जो संबंधित सरकारों के खिलाफ हैं। आपके अपने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के विधायक एल्डो अब्राहम को भी हाल ही में पुलिस द्वारा पीटा गया था और इससे पुलिस के रवैये का पता चलता है, जो अपने आकाओं की धुन पर नाचती है और यह स्वीकार्य नहीं है।
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