उन्होंने कहा कि मंडी का कानून किसान के सर पर से छप्पर हटाने वाला कानून है और मंडी नहीं बचेगी तो सरकारी खरीद नहीं होगी,अगर मंडी की व्यवस्था चली गई तो पंजाब और हरियाणा का किसान तो बर्बाद हो ही जायेगा .. अपने यहां के किसान भी बर्बाद होंगे।
यादव ने कहा,” प्रधानमंत्री मोदी इन कानूनों से जो कर रहे हैं … वे हमारी आने वाली पीढ़ी के लिये दरवाजे बंद कर रहे हैं। मंडी अगर बंद होती है तो किसानों के उत्पाद की सरकारी खरीद भी बंद होगी और अगर यह बंद होगी तो जल्दी ही राशन की दुकान भी बंद होगी क्योंकि सरकार मंडी में जो खरीद करती है वही गेहूं और चावल हमें राशन की दुकान पर मिलता है।”
उन्होंने कहा कि इस संयुक्त किसान मोर्चे में देश के 450 किसान संगठन इकठ्ठे हो गये हैं। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, ”पिछले तीन महीने मोदी, उनके दरबारियों, नेताओं की तमाम कोशिशों के बावजूद इन 450 संगठनों में से एक भी संगठन अभी तक टूटा नहीं है।” यादव ने कहा कि ये कृषि कानून तो रद्द होंगे ही होंगे, हम केंद्र सरकार से फसलों के दाम की गांरटी भी लेंगे, इसके साथ ही शाहजंहापुर (राजस्थान-हरियाणा सीमा) पर जारी आंदोलन को मजबूत बनाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि 27 फरवरी को संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से आह्वान हुआ है कि सब अपने अपने आंदोलन स्थलों पर पहुंचे। सभा में किसान नेता राकेश टिकैत व पूर्व विधायक अमराराम भी शामिल हुए। उल्लेखनीय है कि संयुक्त किसान मोर्चा इस सोमवार से राजस्थान में कई किसान महापंचायतें कर रहा है।
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