“कावेरी जल बंटवारे पर फैसला नहीं, सरकार के मंत्री चुनाव में व्यस्त”

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महान्यावादी के.के. वेणुगोपाल ने गुरुवार को सर्वोच्च न्यायालय से कहा कि सरकार कावेरी जल बंटवारे मामले में न्यायालय की योजना लागू करने पर फैसला नहीं ले सकी, क्योंकि प्रधानमंत्री और अन्य मंत्री कर्नाटक में चुनाव प्रचार कर रहे हैं। वहीं तमिलनाडु सरकार ने अदालत में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि केंद्र कर्नाटक चुनाव से पहले इस मुद्दे का ‘राजनीतिकरण’ कर रही है।

योजना लागू करने के लिए 10 दिन का समय मांगते हुए महान्यायवादी ने प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ की पीठ से कहा, “मंत्रिमंडल के समक्ष इस संबंध में मसौदा योजना पेश कर दिया गया है। कर्नाटक चुनाव की वजह से, प्रधानमंत्री और सभी मंत्री अभी कर्नाटक में हैं। इससे पहले प्रधानमंत्री विदेश (चीन) में थे।”

तमिलनाडु की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील शेखर नेफाड़े ने अपने कड़े प्रत्युत्तर में कहा, “अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है, केंद्र सरकार मुद्दे का राजनीतिकरण कर रही है। वे लोग कर्नाटक में अपने चुनावी परिणाम को लेकर चिंतित हैं। कर्नाटक चुनाव 12 मई को है और वे तब तक किसी भी तरह इस पर फैसला लेना नहीं चाहते। अब बहुत हो गया, यह भारतीय संघ का बेशर्मी भरा पक्षपात है। यह सहकारी संघवाद का खात्मा है।”

अदालत ने इसके बाद कर्नाटक सरकार को यह बताने का निर्देश दिया कि राज्य शासन महीने के अंत तक चार टीएमसी पानी में से कितना पानी छोड़ेगा। न्यायालय ने साथ ही केंद्र से जवाब मांगा कि इस संबंध में निर्देश देने के बाद अब तक क्या कदम उठाए गए हैं, जिसके अंतर्गत कावेरी जल का बंटवारा कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और पुद्दुचेरी में किया जाना था। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को की है।

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