कानपुर : बच्चों के फेफड़े कमजोर कर रहा प्रदूषण, तीन साल के शोध में सामने आए हैरान करने वाले तथ्य

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कानपुर, शहर की बिगड़ती आबोहवा बच्चों के सेहत पर भारी पड़ रही है। बच्चों के फेफड़े कमजोर हो रहे हैं। खेलकूद या जरा सी मेहनत करने पर उनका दम फूलने लगता है। इस वजह से उनकी कार्य क्षमता प्रभावित हो रही है। शरीर में ऑक्सीजन का स्तर सामान्य से कुछ कम होने से रोग प्रतिरोधक क्षमता भी घट रही है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में हुए अध्ययन में यह चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।

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जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में तीन साल चला अध्ययन। बच्चों के शरीर में ऑक्सीजन का स्तर सामान्य से कुछ कम मिला घट रही रोग प्रतिरोधक क्षमता। मौसम में बदलाव से सर्दी-जुकाम बुखार व दूसरी बीमारियों की चपेट में एलर्जी आ जाते हैं।

2017 से 2019 तक  चला शोध 

मेडिकल कॉलेज के हैलट ओपीडी के बाल रोग विभाग की अस्थमा क्लीनिक में सांस से जुड़ी बीमारियों से पीडि़त बच्चों की संख्या बढऩे पर वजह जानने के लिए बाल रोग के डॉ. राजतिलक के निर्देशन में वर्ष 2017 से लेकर वर्ष 2019 तक तीन साल तक अध्ययन हुआ है। इसमें छह वर्ष से 16 वर्ष की आयु के किशोर शामिल किए गए। इसमें अस्थमा क्लीनिक में आए आठ सौ बच्चों का आंकड़ा जुटाया गया। उनकी रक्त संबंधित जांच कराई गई, जिसमें पता चला कि प्रदूषण से शरीर में ऑक्सीजन का स्तर (लेवल) सामान्य से कम पाया गया। इस वजह से उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यून सिस्टम) भी कमजोर हो रही है। मौसम में बदलाव से सर्दी-जुकाम, बुखार व दूसरी बीमारियों  की चपेट में एलर्जी आ जाते हैं। जो धीरे-धीरे समस्या गंभीर होकर निमोनिया और अस्थमा में बदल जाती है।

जल्द बीमार पड़ रहे बच्चे

50 फीसद बच्चों में प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम पाई गई। इस वजह से बार-बार बीमार पडऩे की शिकायत थी। ऐसे बच्चे किसी भी संक्रमण की चपेट में तेजी से आते हैं।

बच्चों की ग्रोथ पर असर

प्रदूषण से बच्चों के शरीर की ग्रोथ भी प्रभावित होती है। अध्ययन के दौरान कई केस मिले हैं। बार-बार बीमार पड?े की वजह से उम्र के हिसाब से उनकी ग्रोथ नहीं पाई गई।

समस्या यह भी सामने आईं

स्कूल का बस्ता उठाकर चलने में थकान खेलने के दौरान जल्दी दम फूलना, सीढि?ां चढ?े में सांस फूलने लगती।

कुछ चिंताजनक तथ्य सामने आए हैं। इसमें बच्चों का जल्द थकना, सांस फूलना व सामान्य बीमारियों में दवाओं का प्रभावहीन होना है। प्रदूषण की भयावह  स्थिति से निपटने को वृहत कार्ययोजना जरूरी है। इसके लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे। स्कूल उन्हेंं स्वच्छ वातावरण मुहैया कराएं। माता-पिता बच्चों के खानपान पर पूरा ध्यान दें।  – डॉ. राज तिलक, सीनियर पीडियाट्रिक पल्मनोलॉजिस्ट एवं पूर्व प्रवक्ता, बाद रोग विभाग, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज।

अहम तथ्य

  • सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के बच्चे
  • आॢथक रूप से कमजोर व मध्यमवर्गीय परिवार के बच्चे
  • 03 साल तक चला अध्ययन
  • 800 बच्चे किए गए शामिल
  • 30 फीसद बच्चियां भी शामिल
  • 06-16 वर्ष तक की उम्र के थे

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