कश्मीर: बड़े नेताओं पर हमले की फिराक में तिलमिलाए हुए आतंकी
खुफिया एजेंसी ने सरकार को दी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों ने मिलकर यह मास्टर प्लान तैयार किया है. जैश-ए-मोहम्मद का मुखिया मौलाना मसूद अजहर इस प्लान का मास्टर माइंड है. गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों के हाथों लगातार शिकस्त झेलने की वजह से आतंकी संगठनों ने अपना निशाना घाटी से दूसरी तरफ मोड़ दिया है.
इंटेलिजेंस एजेंसी को जानकारी मिली है कि आतंकी संगठन भारत में किसी बड़े राजनीतिक शख्सियत की हत्या की योजना पर जोर-शोर से काम कर रहे हैं. आईबी की इस रिपोर्ट के बाद केंद्र और राज्य सरकारें मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों की सुरक्षा को लेकर चौकन्ना हो गई हैं. टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक खुफिया एजेंसियों ने इस बारे में पिछले दिनों ही सरकार के साथ जानकारी साझा की है.
जम्मू-कश्मीर में पिछले चार-पांच दिनों में ही सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में 11 आतंकी मारे गए हैं, जिसमें जैश-ए-मोहम्मद का सरगना मसूद अजहर का भांजा ताल्हा रशीद भी शामिल है. माना जा रहा है कि भारतीय सुरक्षाबलों की इस कार्रवाई के बाद आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का चीफ अजहर खासा नाराज है. जैश प्रमुख अजहर मसूद को अपने भांजे की मौत से गहरा सदमा पहुंचा है.
बता दें कि ताल्हा रशीद जम्मू-कश्मीर में हाल के दिनों में बड़े आतंकी वारदात में मुख्य भूमिका अदा कर रहा था. पुलवामा पुलिस कैंप पर हमला हो या फिर श्रीनगर एयरपोर्ट पर हुए हमले में उसकी भूमिका काफी अहम थी.
एक तरफ मोदी सरकार आने के बाद पिछले कुछ सालों में जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों की कार्रवाई ने आतंकियों की कमर तोड़ दी है तो दूसरी तरफ घाटी के भटके युवा भी अब मुख्यधारा में लौटने लगे हैं. इन सारी घटनाओं से आतंकी संगठनों के आकाओं में तिलमिलाहट पैदा हो गई है. दोनों आतंकी संगठनों को इन दो घटनाओं ने इतना परेशान किया कि वह अब तिलमिलाहट में बीजेपी के कुछ नेताओं को निशाना बनाना चाह रही है.
देश के जाने-माने रक्षा विशेषज्ञ और वरिष्ठ पत्रकार क़मर आगा फर्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, ‘बदलते घटनाक्रम में दो बात सामने आ रही है. एक तो पाकिस्तान की कश्मीर पॉलिसी बिल्कुल फेल हो गई है. इनके 190 लोग मर गए हैं. सारे कमांडर लगभग मर गए हैं. कमांडर से मेरा मतलब है वो जो आतंकी संगठन को लीड कर सके. इनको पाकिस्तान से कमांडर भेजना पड़ रहा है. लखवी के भतीजे को भेजा जो कि बहुत ही अनुभवी था, जिसके बारे में सोचा भी नहीं था कि वह मर जाएगा. इनके पास अब लोग भी नहीं बचे हैं. बॉर्डर पर भारतीय सुरक्षाबल काफी मुस्तैद और सतर्क है.’
कमर आगा आगे कहते हैं, ‘देखिए आतंकवादियों का मुख्य काम होता है आतंक फैलाना. जब भी उनकी तरफ से कोशिश की जाती है वे एनकाउंटर में मारे जा रहे हैं. कश्मीर में और ग्लोबली मुसलमानों को भी इस बात का एहसास हो गया है कि मिलिटेंसी के जरिए कोई ऑब्जेक्टिव पूरा होने वाला नहीं है. जो पुराने आतंकी जो घाटी में हैं वह फंस चुके हैं. वह वहां से निकलना चाहें तो भी नहीं निकल सकते. अब इन लोगों की कोशिश होगी कि आतंक बना रहे. अब यह जरूरी नहीं है कि वह सत्ता पक्ष के लोगों पर ही सिर्फ टारगेट करें, विपक्षी लीडर्स पर भी टारगेट कर सकते हैं. कुल मिलाकर हम कह सकते हैं आतंकी संगठन न्यूज में बने रहना चाहते हैं.’
गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में लश्कर-ए-तैयबा अभी भी एक खतरनाक संगठन बना हुआ है. घाटी में अभी भी इस संगठन के स्थानीय और विदेशी लड़ाकू मिलाकर लगभग 100 आतंकी मौजूद हैं.
पिछले सप्ताह ही घाटी के एक आतंकवादी ने आतंक का रास्ता छोड़ कर घर वापसी की थी. माजिद इरशाद खान नाम का यह आतंकी अपनी मां की अपील के बाद मुख्यधारा में लौटा था. इससे भी आतंकी संगठनों के कमर टूटने की बात साबित होती है. ऐसे में आतंकी संगठनों के आकाओं ने नए मास्टर प्लान के जरिए फिर से घाटी के युवाओं का विश्वास हासिल करने के लिए हमला करने की रणनीति बनाई है.
दूसरी तरफ आतंकी संगठन अल-कायदा ने भी भारत में अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं. इंडियन एक्प्रेस ने कुछ दिन पहले ही अल-कायदा के बारे में एक नया खुलासा किया था. इस खुलासे में कहा गया था कि अल-कायदा भारत के पढ़े-लिखे युवा मुस्लिमों के लिए क्षेत्रीय भाषाओं में जिहादी साहित्य की बिक्री शुरू कर दी है. खास बात यह है कि यह बिक्री सोशल साइट्स के जरिए की जा रही है.
अलकायदा खासकर डॉक्टर और इंजीनियर जैसे नौकरी पेशा करने वाले मुस्लिम युवाओं को उकसाने का काम कर रहा है. जिहादी साहित्य के साथ सोशल साइट्स पर भारतीय भाषाओं में वीडियो भी उपलब्ध करवाया जा रहा है.
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