ऑनलाइन PORN देखना धरती और मानव के लिए बड़ा खतरा, जानिये कैसे !

ऑनलाइन PORN देखना धरती और मानव के लिए बड़ा खतरा, जानिये कैसे !

नई दिल्लीं। ऑनलाइन पॉर्न देखना धरती के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। ऑनलाइन पॉर्नोग्राफी की स्ट्रीमिंग से भारी मात्रा में कॉर्बन डाइऑक्साइड प्रोड्यूस हो रहा है।

‘द शिफ्ट प्रोजेक्ट’ की एक रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि ऑनलाइन पॉर्नोग्राफी की स्ट्रीमिंग से यूरोप के देश बेल्जियम के बराबर कॉर्बन डाइऑक्साइड प्रड्यूस हो रहा है। यानि कि बेल्जियम जितना कॉर्बन डाइऑक्साइड प्रड्यूस कर रहा है, उतना ही ऑनलाइन पॉर्नोग्राफी की स्ट्रीमिंग से निकल रही है।

‘द शिफ्ट प्रॉजेक्ट’ के रिसर्चर्स ने फोन और टीवी से लेकर दूसरे डिवाइसेज तक इस आनलाइन वीडियो डेटा को पहुंचाने में लगने वाली बिजली को अनुमानित किया।

इसके बाद इन लोगों ने कुल उत्सर्जन का अनुमान लगाने के लिए इलेक्ट्रिसिटी जेनरेशन से होने वाले कार्बन एमिशन का ग्लोबल ऐवरेज निकाला।

रिसर्च में पाया गया कि डिजिटल टेक्नॉलजी से होने वाले एनर्जी कंजंप्शन में सालाना 9 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। दुनियाभर के डेटा फ्लो का 60 प्रतिशत ऑनलाइन वीडियो से आता है।

रिसर्च में विडियो में ैालचम और इसके जैसे दूसरे विडियो स्ट्रीमिंग सर्विसेज को शामिल नहीं किया गया था। इनको शामिल करने से वर्ल्ड डेटा फ्लो 60 प्रतिशत से बढ़कर 80 प्रतिशत हो जाता।

8K रेजॉलूशन और दूसरे हाई क्वॉलिटी वाले विडियो आने के बाद कार्बन एमिशन में और बढ़ोत्तरी हो सकती है. वहीं, Google Stadia जैसे गेम स्ट्रीमिंग सर्विस भी हालात को और अधिक बिगाड़ेंगे।

द शिफ्ट प्रॉजेक्ट ने सुझाव दिया है कि ऑनलाइन वीडियोज के ऑटोप्ले को बंद रखा जाए और जब जरूरी हो तभी HD क्वॉलिटी के वीडियोज को ट्रांसमिट किया जाए।

पिछले दिनों अनुमान लगाया का था कि डिजिटल टेक्नोलॉजी ग्रीन हाउस गैस एमिशन (उत्सर्जन) का 4 प्रतिशत पैदा करता है। ये आंकड़ा साल 2025 तक बढ़कर 8 प्रतिशत हो जाएगा।

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *