कानपुर जो कमाल आप चाहकर भी अपने निर्माण कार्यों में मुमकिन नहीं पाते, मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना) में देख दांतों तले अंगुली दबा लेंगे। एक दिन में एक लाख रुपये लागत का निर्माण पूरा हो गया, वो भी एक मजदूर लगाकर। भीतरगांव विकासखंड में ये गजब भी हुआ। पिछले माह ही इस विकासखंड के संविदा कंप्यूटर आपरेटर अपने कारनामों से सुर्खियों में आए थे।

मुख्यमंत्री वृक्षधन और कैटल शेड योजना में अपनों को आवंटन, चाचा की फर्म से आपूर्ति तो पत्नी, चाची और छोटे भाई की पत्नी के नाम से एसएचजी (स्वयं सहायता समूह) गठित कर ग्राम सभाओं को सीआइबी (सिटीजन इनफार्मेशन बोर्ड) सप्लाई कर लाखों का गोलमाल किया गया था। दैनिक जागरण में खेल उजागर होने के बाद जांच तो बैठी, मगर इसके नतीजे अब अफसरों के खेल में उलझे हैं।
अफसरों की जांच जहां भी अटकी हो, मगर मनरेगा में अपनों को रेवडिय़ां बांटने के घोटाले की किताब के पन्ने एक के बाद एक खुल रहे हैं। पतारा विकासखंड में तैनात संविदा कंप्यूटर आपरेटर विजय बहादुर कुशवाहा भीतरगांव विकासखंड के बारीगांव का निवासी है। विजय के पिता छेदालाल को भी मनरेगा जॉब कार्डधारक दर्शा कर 2019-20 में कैटल शेड आवंटित किया गया है। कमाल यह है कि 1,02,652.88 रुपये लागत वाले कैटल शेड का निर्माण सिर्फ एक कार्यदिवस की मजदूरी में हुआ है।
एक मजदूर ने एक दिन में ही निर्माण पूरा कर दिया। उधर, बारीगांव के रोजगार सेवक शैलेंद्र यादव के पिता मुंशीलाल को 1,24,407 रुपये और पसेमा के वर्तमान ग्राम प्रधान अजीत यादव की पत्नी गायत्री देवी को भी 1,52,518 रुपये लागत का कैटल शेड आवंटित किया गया। इन सभी कामों का टेंडर प्रचलित समाचार पत्रों में प्रकाशन नहीं हुआ। निर्माण सामग्री आपूर्ति भीतरगांव के कंप्यूटर आपरेटर के चाचा की फर्म से ही हो गई। यहां हालात बाड़ के ही खेत की फसल खाने जैसे हैं, लेकिन सवाल यह है इस धांधली को आखिर देखे कौन?
अधिकांश ब्लाकों में केंद्रीयत खरीद
मनरेगा एक्ट एवं शासन की मनाही के बावजूद जिले के अधिकांश विकासखंडों में अफसरों ने सीआइबी की केंद्रीयत खरीद कीै। पतारा में शत-प्रतिशत खरीद शहर के श्यामनगर की वसुधा इंटरप्राइजेज से हुईं। भीतरगांव में कंप्यूटर आपरेटर तो चौबेपुर में इंदलपुर जुगराज के रोजगार सेवक साजिद अली की बीबी और परिजन के समूह, ककवन एवं बिधनू में गांव पिपौरी की पूर्व प्रधान के पति की फर्म से आपूर्ति की गई है।
मनरेगा के तहत बने कैटिल शेड में अनियमितता की जानकारी नहीं है। यदि किसी गांव में गड़बड़ी हुई तो जांच कराई जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी।– डॉ. महेंद्र कुमार, सीडीओ
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