उलेमाओं और मुफ़्तीयों ने मुस्लिम समुदाय से की अपील-रमजान की नमाज घर से करें अदा

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हैदराबाद। रमजान के पवित्र महीने के दौरान मस्जिदों में जाने के बजाय, इस्लामिक विचारों के सभी स्कूलों के उलेमाओं और मुफ़्तीयों ने मुस्लिम समुदाय से अपने घरों पर तरावीह की नमाज़ अदा करने की अपील की है। देश में COVID-19 के प्रसार को रोकने के लिए देशव्यापी लॉकडाउन किया हुआ है।

जामिया निज़ामिया के एक प्रेस नोट के अनुसार, उलेमाओं और मुफ़्तीस ने समुदाय के लोगों से ‘घरों में इफ्तार की दावत देने के लिए .. और इफ्तार पार्टियों की मेजबानी नहीं करने का आग्रह किया है।’ उन्होंने इसके बजाय लोगों से अपील की है कि वे इसके माध्यम से बचाए गए धन का दान करें। समाज के वंचित वर्ग के लिए।

नोट में कहा गया, ‘आगे, उलेमाओं और मुफ़्तीस ने लोगों से अपील की है कि सरकार द्वारा लगाए गए लॉकडाउन का पालन करें। उन्हें स्वास्थ्य और चिकित्सा विशेषज्ञों की सलाह का पालन करना चाहिए और निवारक उपायों का पालन करना चाहिए, विशेष रूप से सामाजिक दूरी, सख्ती से।’

उन्हें तरावीह के लिए सभाओं को आयोजित करने से बचने के लिए कहा गया है। इससे पहले सोमवार को, इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया ने भी एक एडवाइजरी जारी की थी, जिसमें मुसलमानों को रमज़ान के पवित्र महीने के दौरान लॉकडाउन नियमों का पालन करने के लिए कहा गया था। रमजान का पवित्र महीना, 24 अप्रैल या 25 अप्रैल से शुरू होने की संभावना है।

रमजान के महीने के दौरान, श्रद्धालु लगभग 30 दिनों तक कठोर उपवास करते हैं और सुबह से शाम तक भोजन या पानी का सेवन नहीं करते हैं। वे सेहरी (सुबह का भोजन) खाते हैं और शाम को इफ्तार के साथ अपना दिन भर का उपवास तोड़ते हैं।

केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री एवं केंद्रीय वक्फ परिषद अध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने भी रमजान के पवित्र महीने में सभी धार्मिक, सार्वजनिक, व्यक्तिगत स्थलों पर लॉकडाउन, कर्फ्यू, सोशल डिस्टेंसिंग का प्रभावी ढंग से पालन करने एवं लोगों को अपने-अपने घरों पर ही रह कर इबादत आदि करने को कहा था।

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