इशारों-इशारों में ‘एक राष्ट्र, एक भाषा’ के विचार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी किया खारिज

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हिंदी दिवस पर गृह मंत्री अमित शाह के बयान का विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। ऐक्टर कमल हासन की कठोर चेतावनी के बाद अब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इशारों-इशारों में ‘एक राष्ट्र, एक भाषा’ के विचार को खारिज किया है। राहुल ने ट्वीट कर कहा कि देश में कई भाषाओं का होना किसी कमजोरी की निशानी नहीं है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने तिरंग के चित्र के साथ 23 भारतीय भाषाओं के नाम लिखे।

उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, ‘ओड़िया, मराठी, कन्नड़, हिंदी, तमिल, अंग्रेजी, गुजराती, बंगाली, उर्दू, पंजाबी, कोंकणी, मलयालम, तेलुगू, असमी, बोडो, डोगरी, मैथिली, नेपाली, संस्कृत, कश्मीरी, सिंधी, संथाली, मणिपुरी। भारत की कई भाषाएं इसकी कमजोरी नहीं हैं।’ स्पष्ट है कि राहुल गांधी ‘एक राष्ट्र, एक भाषा’ के समर्थन में नहीं हैं।

इससे पहले ममता बनर्जी, असदुद्दीन ओवैसी, स्टालीन, कमल हासन समेत विपक्ष के कई नेताओं ने इस विचार का विरोध किया। मक्कल निधि मैय्यम अध्यक्ष कमल हासन ने तो यहां तक धमकी दे डाली कि अगर एक ‘राष्ट्र, एक भाषा’ के विचार को आगे बढ़ाया गया तो देश और तमिलनाडु में बड़ी जंग छिड़ जाएगी जो किसी के हित में नहीं होगी।

दरअसल, पूरा विवाद 14 सितंबर को हिंदी दिवस के मौके पर गृह मंत्री अमित शाह के भाषण से पैदा हुआ। उन्होंने कहा था कि पूरे देश की एक भाषा होना अत्यंत आवश्यक है जो दुनिया में भारत की पहचान बने। गृह मंत्री ने कहा कि आज देश को एकता की डोर में बांधने का काम अगर कोई भाषा कर सकती है तो वह सर्वाधिक बोली जाने वाली हिंदी भाषा ही है।

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