इलाहाबाद हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: जासूसी के झूठे आरोपों से बरी प्रदीप कुमार को मिलेगी एडीजे की नियुक्ति!
क्या आप जानते हैं एक ऐसे शख्स की कहानी जिसपर जासूसी और देशद्रोह जैसे गंभीर आरोप लगे, लेकिन अदालत ने उन्हें बेक़सूर साबित कर दिया? यह कहानी है प्रदीप कुमार की, जिन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद अतिरिक्त जिला न्यायाधीश (एडीजे) के पद पर नियुक्त किया जाएगा। इस फैसले ने न सिर्फ़ न्यायपालिका की ताकत दिखाई है, बल्कि साबित भी किया है कि सच्चाई हमेशा जीतती है। आइये जानते हैं इस पूरे मामले की पूरी जानकारी।
प्रदीप कुमार: एक बेगुनाह की लड़ाई
प्रदीप कुमार ने साल 2016 में उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा परीक्षा पास की थी और 2017 में उनकी चयन सूची में जगह भी मिल गई थी। लेकिन, उन पर लगे जासूसी और देशद्रोह के आरोपों की वजह से उनकी नियुक्ति रुक गई। यह आरोप इतने गंभीर थे कि उनके करियर पर ही ग्रहण लग गया। लेकिन प्रदीप कुमार ने हिम्मत नहीं हारी और कानूनी लड़ाई लड़ते रहे।
झूठे आरोपों का सच
साल 2002 में कानपुर के कोतवाली थाने में प्रदीप कुमार के खिलाफ दो मामले दर्ज हुए थे – एक जासूसी (आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम की धाराएं 3, 6 और 9) और दूसरा देशद्रोह (आईपीसी की धारा 124ए) का। 2014 में, कानपुर नगर के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने इन दोनों मामलों में उन्हें बरी कर दिया, क्योंकि अभियोजन पक्ष कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाया। फिर भी, यह मामला उनके एडीजे बनने की राह में बाधा बना रहा था।
हाईकोर्ट का करारा जवाब: न्याय की जीत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने पाया कि प्रदीप कुमार को इन मामलों में सम्मानपूर्वक बरी किया गया है और अभियोजन पक्ष की कहानी में कोई सच्चाई नहीं मिली। कोर्ट ने राज्य सरकार की इस देरी पर कड़ी नाराज़गी जाहिर करते हुए कहा कि ऐसे व्यक्ति को, जिसने खुद को अदालत में निर्दोष साबित कर दिया है, नियुक्ति से वंचित रखना संविधान और कानून का उल्लंघन है।
कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्णय बिंदु
- हाईकोर्ट ने साफ़ किया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई ऐसा सबूत नहीं है जो उसे किसी विदेशी एजेंसी से जोड़ता हो।
- कोर्ट ने कहा कि सिर्फ़ खुफिया एजेंसियों के ‘रडार’ पर होना किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं है।
- कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता के पिता पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप उनके चयन में बाधा नहीं बन सकते। किसी को अपने परिवार के किसी सदस्य की गलतियों के लिए ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
आगे का रास्ता: न्याय का प्रतीक
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद, अब उत्तर प्रदेश सरकार को 15 जनवरी 2025 तक प्रदीप कुमार को एडीजे के पद पर नियुक्ति पत्र जारी करना होगा। यह फैसला न केवल प्रदीप कुमार के लिए बल्कि सभी उन लोगों के लिए एक प्रेरणा है जो झूठे आरोपों का सामना कर रहे हैं। यह फैसला एक मजबूत संदेश देता है कि न्याय की जीत होगी, और सच्चाई हमेशा उजागर होगी।
Take Away Points
- प्रदीप कुमार को झूठे जासूसी और देशद्रोह के आरोपों से बरी किया गया।
- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनकी एडीजे के पद पर नियुक्ति का आदेश दिया।
- कोर्ट ने राज्य सरकार की देरी पर कड़ी नाराज़गी जाहिर की।
- यह फैसला न्याय और सच्चाई की जीत का प्रतीक है।

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