आइए जानें, आखिर क्या कहते हैं प्रियंका के सितारे..

नई दिल्ली।लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस पार्टी ने बड़ा धमाका किया है। पार्टी ने मास्टर स्ट्रोक खेलते हुए सोनिया गांधी की बेटी और राहुल गांधी की बहन प्रियंका गांधी को कांग्रेस का महासचिव नियुक्त किया है। इसके बाद कांग्रेस में जहां खुशी की लहर दौड़ गई, वहीं तमाम राजनीतिक विश्लेषकों ने भी इसके फायदे नुकसान गिनाने शुरू कर दिए हैं।

थोड़ी देर बाद ही सोशल मीडिया पर प्रियंका की कुंडली का विश्लेषण भी ज्योतिषाचार्यों की ओर से आने लगा कि कांग्रेस का यह तुरुप का पत्ता कितना कारगर साबित होने वाला है.. तो आइए जानते हैं आखिर क्या कहते हैं प्रियंका का सितारे…।  प्रियंका गांधी का जन्म 12 जनवरी 1972 को शाम 5 बजकर 5 मिनट पर नई दिल्ली में हुआ था। उनकी कुंडली मिथुन लग्न की है और राशि वृश्चिक है। जन्मांक के आधार पर उनका मूलांक 3 और भाग्यांक 5 है। 23 जनवरी 2019 को उन्होंने राजनीति में अधिकृत रूप से प्रवेश लिया है।

यह दिन उनके भाग्यांक 5 से गहरा जुड़ा हुआ है।  दिनांक 23 1 2019 का मूलांक-भाग्यांक दोनों 5 है। ज्योतिषाचार्यों की मानें तो आज का यह निर्णय निश्चित ही उनके लिए बेहद लकी है। ज्योतिष के अनुसार, प्रियंका गांधी की लग्न मिथुन का स्वामी और भाग्यांक का ग्रह बुध है। बुध किशोर व युवा ग्रह माना जाता है।

उनका व्यक्तित्व भी ऐसा ही है। वे विश्व के सबसे युवा आबादी वाले देश में नई पीढ़ी की आवाज बनकर उभर सकती हैं। उनकी यह प्रभावशीलता भारत के सबसे बड़े मत-वर्ग को गहरा प्रभावित करेगी। संभवतः वे सबसे असरदार ढंग से युवा भारत की आवाज को बुलंद करेंगी।ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, जन्मांक 3 होने से गुरु ग्रह की गरिमा और गंभीरता प्रियंका के व्यक्तित्व में है।

उन्हें राजनीतिक स्तर पर हल्के में लेना किसी भी दल या व्यक्ति के लिए भूल होगी। वर्ष 2019 भी बृहस्पति के अंक 3 से प्रभावित है। निश्चित इस वर्ष वे उल्लेखनीय प्रदर्शन करने वाली हैं। विशेषतः मार्च से मई माह तक उनकी सक्रियता अविस्मरणीय होगी। गुरु उनकी कुंडली में सातवें घर में सूर्य बुध के संग स्वराशिस्थ हैं, जो उन्हें संगठनात्मक क्षमता प्रदान करते हैं।

सरल शब्दों में समझें तो कांग्रेस पार्टी का प्रत्येक कार्यकर्ता उनसे जुड़ाव अनुभव करेगा और सूझबूझ से वे सबको साथ लेकर आगे भी बढ़ पाएंगी।वर्तमान में उनकी विंशोत्तरी महादशा शुक्र की है। इसमें शनि की अंतरदशा चल रही है. दोनों ही ग्रह मिथुन लग्न में योगकारक हैं। पंचमेश और भाग्येश का संयोग बनाए हुए हैं।

अर्थात् बुद्धि-विवेक-भाग्य के अद्भुत संयोग में हैं। राशि वृश्चिक है। वर्तमान गोचर में शनि की साढ़ेसाती है। राजनीतिज्ञों के लिए अक्सर साढ़ेसाती बड़े लाभ लाती है। कारण, शनिदेव स्वयं जनता के कारक हैं। साथ ही गुरु का उनकी राशि में गोचर उन्हें धीर गंभीर और जिम्मेदारी का भाव दे रहा है। इनके प्रभाव से वे इस वर्ष पद प्रतिष्ठा को प्राप्त भी होंगी और उनका निर्वहन भी पूरी संजीदगी से करेंगी।

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