आइएएस-पीसीएस : संस्कृत विषय में करें तैयारी, पांच और जिलों में खुलेगी निश्शुल्क कोचिंग

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लखनऊ, विकास के इस डिजिटल युग में देव भाषा संस्कृत भी अब कदमताल करने लगी है। पुराणों से निकलकर आम लोगों तक पहुंचने वाली सभी भाषाओं की जननी संस्कृत अब आइएएस और पीसीएस की तैयारी करने वाले युवाओं की पसंद बन गई है। उप्र संस्कृत संस्थानम् की ओर से ऐसे विद्यार्थियों को प्राेत्साहित करने के लिए राजधानी में निश्शुल्क कोचिंग की शुरुआत दो साल पहले की गई थी। सफलता के बाद अब पांच जिलों में कोचिंग खोलने की तैयारी शुरू हो गई है। उप्र संस्कृत संस्थानम् के निदेशक पवन कुमार ने बताया कि गोरखपुर, प्रयागराज,वाराणसी, बरेली, आगरा व झांसी में कोचिंग खोलने की कवायद चल रही है।

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सिविल परीक्षा की तैयारी करने वाले 21 से 35 वर्ष आयुवर्ग के ऐसे युवाओं का चयन किया जाता है जिनका ऐच्छिक विषय संस्कृत होता है। साक्षात्कार में चयनित युवाओ को तीन हजार रुपये प्रतिमाह वजीफा देने का भी प्रावधान है।

तीन हजार रुपये मिलेगा वजीफा

सिविल परीक्षा की तैयारी करने वाले 21 से 35 वर्ष आयुवर्ग के ऐसे युवाओं का चयन किया जाता है जिनका ऐच्छिक विषय संस्कृत होता है। साक्षात्कार में चयनित युवाओ को तीन हजार रुपये प्रतिमाह वजीफा देने का भी प्रावधान है। संस्कृत विषय में गणित जैसे अंक मिलते हैं। इसकी वजह से भी संस्कृत के प्रति युवाओं का रुझान बढ़ रहा है। संस्थानम् की वेबसाइट upsanskritsansthanam.in पर जानकारी ली जा सकती है।

राजधानी में हुआ साक्षात्कार

राजधनी के अलीगंज में चलने वाली कोचिंग के लिए 113 युवाओं ने ऑनलाइन आवेदन किया है। उप्र संस्कृत संस्थानम् के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी डीके मिश्रा ने बताया कि दो दिन चले साक्षात्कार का बुधवार को समापन होे गया। साक्षात्कार में दिल्ली विवि के प्रो.पंकज मिश्रा,डॉ.कविता श्रीवास्तव,डा.एपी सिंह, अजीम अंसारी, डा.जयप्रकाश, डा.महेंद्र पाठक, बीके सिंह, डा.सारिका व प्रदीप श्रीवास्तव ने साक्षत्कार लिया। परिणाम के बाद कोचिंग शुरू होगी।

‘देव भाषा संस्कृत न केवल वेद पुराणों की भाषा है बल्कि यह हमारी वैदिक संस्कृति का प्रतीक भी है। विकास के इस डिजिटल युग में संस्कृत काे मुख्यधारा में लाने की कवायद के बीच आइएएस और पीसीएस परीक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं को भी जोड़ा जा रहा है। प्रदेश सरकार की मंशा के सापेक्ष वैदिक संस्कति का बचाने का यह प्रयास है। पांच और जिलों में शुरुआत होेने से संस्कृत का प्रसार बढ़ेगा और युवाओं को लाभ होगा।‘   -डॉ.वाचस्पति मिश्रा, अध्यक्ष, उप्र संस्कृत संस्थानम् 

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