अभी अभीः भारत में कोरोना को लेकर आई बुरी खबर, अगले दस दिन में दिखेगा कोरोना वायरस का भीषण रुप ?

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नई दिल्ली। ICMR के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक के अनुसार ने अभी तक के ट्रेंड के आधार पर किये आंकलन से साफ संकेत मिल रहा है कि भारत में कोरोना वायरस का फैलाव अपने पीक के करीब है और 30 अप्रैल तक यह पीक तक पहुंच जाएगा। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आइसीएमआर के आकलन का समर्थन करते हुए कहा कि अगले दो-तीन दिन में स्थिति और भी साफ हो जाएगी। दरअसल पीक पर पहुंचने का अर्थ यह है कि भारत इसका आकलन करने के लिए पूरी तरह तैयार होगा कि अब कदम किस दिशा में उठने चाहिए। रोजाना संक्रमण की गति तेज दिखेगा लेकिन नंबर दोगुना होने में वक्त बढेगा। इस बीच कोरोना मुक्त होने वालों की संख्या भी बढ़ेगी। कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में अगला दस दिन भारत के लिए सबसे अधिक चुनौतियों वाला साबित हो सकता है। आइसीएमआर के वैज्ञानिकों के अनुसार 30 अप्रैल तक वायरस का प्रसार तेज दिखेगा और इस लिहाज से प्रतिदिन संक्रमण की संख्या भी बढ़ेगी। यानी भारत में कोरोना संक्रमण अपने चरम पर होगा। लेकिन उसके बाद ग्राफ नीचे आने लगेगा। यही कारण है कि जिन जिलों में कोरोना के नए मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, वहां की कमान केंद्र सरकार ने अपने हाथ में ले ही और इसके लिए छह अंतरमंत्रालयी विशेष टीमों का गठन कर दिया है। इसमें से दो-दो महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के लिए हैं और एक एक मध्य प्रदेश और राजस्थान के लिए बनाई गई है। इसमें अतिरिक्त सचिव स्तर के अधिकारी होंगे ताकि वरिष्ठता के आधार पर वह ठोस निर्णय ले सकें।

कोरोना के खिलाफ जंग में मिल रही सफलता के बीच कुछ राज्यों में मरीजों की तेजी से बढ़ती संख्या ने चिंता भी बढ़ा दी है। यही कारण है कि केंद्र सरकार ने गंभीर स्थिति वाले राज्यों और जिलों में दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराने की कमान अपने हाथ में ले ली है। गृह मंत्रालय के अनुसार महाराष्ट्र के मुंबई और पुणे, पश्चिम बंगाल के कोलकाता, हावड़ा, मेदनीपुर पूर्व, 24 परगना उत्तर, दार्जलिंग, कलिम्पोंग व जलपाईगुड़ी, मध्यप्रदेश के इंदौर और राजस्थान के जयपुर में स्थिति बदतर होती जा रही है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि लॉकडाउन के बावजूद इन स्थानों पर हालात बिगड़ने के पीछे का एक मुख्य कारण यहां सोशल डिस्टेंसिंग (शारीरिक दूरी) और लोगों की आवाजाही रोकने के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया जाना है। लॉकडाउन से संबंधित दिशा-निर्देशों के उल्लंघन की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद केंद्र सरकार छह अंतर मंत्रालयी टीम गठित इन इलाकों में भेजने का फैसला किया है।

इनमें एक-एक टीमें मध्यप्रदेश और राजस्थान में और दो-दो टीमें महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में भेजी जाएगी। केंद्र सरकार के अतिरिक्त सचिव जैसे वरिष्ठ अधिकारी के नेतृत्व में टीम भेजने का मतलब साफ है कि वरिष्ठता में राज्य को कोई भी अधिकारी उसके समकक्ष नहीं होगा और उसके आदेशों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित कराना संभव होगा।

वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार इन छह टीमों को गंभीर स्थिति वाले इलाकों में कोरोना के खिलाफ लड़ाई की पूरी कमान संभालनी होगी, जिनमें लॉकडाउन का कड़ाई से पालन से लेकर रोकथाम प्लॉन को लागू करना। लोगों को दिक्कतों को दूर करने के लिए जरूरी सामान की आपूर्ति से लेकर गरीबों और मजदूरों के लिए राहत शिविरों के सुचारू संचालन की जिम्मेदारी इसी टीम की होगी। यही नहीं, यह टीम इन इलाकों में कोरोना के इलाज के लिए विशेष अस्पतालों से निर्माण, वहां पीपीई किट, वेंटिलेटर, दवाइयां व अन्य जरूरी सामान की उपलब्धता सुनिश्चित कराने से लेकर यह टीम कांट्रेक्ट ट्रेसिंग और सैंपल कलेक्शन के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगा।

जाहिर है कि इन इलाकों में कोरोना के खिलाफ लड़ाई की पूरी कमान केंद्रीय टीम के जिम्मे होगी और राज्य सरकार के अधिकारियों को उनके निर्देशों का पालन करना होगा। गृह सचिव अजय भल्ला ने केंद्रीय टीम भेजने की जानकारी राज्य सरकारों के देते हुए साफ कर दिया है कि लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग (शारीरिक दूरी) के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन से इन जिलों में रहने वाले लोगों के साथ ही इसके बाहर रहने वालों के लिए खतरनाक हो सकता है।

गृह सचिव ने यह भी बता दिया है कि आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 35 के विभिन्न उपबंधों के अधीन केंद्र सरकार को ऐसे जिलों में बीमारी को फैलने से रोकने के लिए केंद्रीय टीम को भेजने का अधिकार है और सुप्रीम कोर्ट ने भी 31 मार्च के अपने फैसले में सभी राज्यों को केंद्र के दिशा-निर्देशों के पूरी तरह पालन करने का निर्देश दिया था।

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