अब विधायकों और सांसदों के आपराधिक मामलों की सुनवाई स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट में 15 जुलाई से

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधायकों और सांसदों के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों की सुनवाई के लिए इलाहाबाद में जल्द ही स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाई जाएगी। बुधवार की शाम को प्रदेश के विधि विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। इस कोर्ट का गठन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हो रहा है, जिसके तहत हर राज्य में इस तरह की स्पेशल फास्ट ट्रैक अदालतें बनाई जानी हैं।

विधि विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि विभाग ने इससे संबंधित जरूरी आदेश जारी कर दिए हैं। अब मामला हाई कोर्ट के पास है। उम्मीद है कि यह स्पेशल कोर्ट 15 जुलाई से शुरू हो जाएगी। उन्होंने बताया कि स्पेशल कोर्ट बनाए जाने का उद्देश्य यह है कि यहां विधायकों और सांसदों पर दर्ज मुकदमों की सुनवाई होगी। इन अदालतों में सुनवाई के बाद उनपर लगे मामलों का जो फैसला होगा, उसी आधार पर वे चुनाव लड़ सकेंगे।

उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में विधायकों और सांसदों पर 2000 से ज्यादा मामले पेंडिंग हैं। अदालतों में इतने केस हैं कि जल्दी मामलों में सुनवाई नहीं हो पाती है। स्पेशल कोर्ट से मामलों में तेजी से सुनवाई हो सकेगी। स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट में सिर्फ माननीयों पर लगे आपराधिक केस की सुनवाई होगी। अधिकारी ने बताया कि उम्मीद है कि 2019 लोकसभा से पहले माननीयों पर लगे सारे आपराधिक मामलों की पेंडेंसी खत्म कर ली जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में आदेश दिया था कि राज्यों में स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएं। इन अदालतों में सुनवाई करके 1 मार्च 2018 तक विधायकों और सांसदों पर लगे केस निपटाए जाएं। यह सिंगल कोर्ट होगी, जिसमें सात स्टाफ और एक जज होंगे। इसमें जज एडीजे रैंक के होंगे जो हायर जुडिशल सर्विस से होंगे।

 

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