अब मंदिर निर्माण का रास्ता होगा साफ, राम मंदिर निर्माण की दिशा में बढ़े सरकार कदम, पढ़े पूरी खबर !

नई दिल्ली । आरएसएस के नेतृत्व वाले कई संगठन विवादित भूमि पर मंदिर निर्माण के लिए कानून की मांग कर रहे हैं। बीजेपी के एक नेता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में सरकार की याचिका राम भक्तों और बीजेपी कैडरों की गहरी पीड़ा को दूर करने का प्रयास है।

इस टिप्पणी से कुछ घंटे पहले ही केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से अयोध्या में विवादित ढांचे के आसपास अधिग्रहित गैर-विवादित भूमि को न्यास और दूसरे मालिकों को लौटाने की अनुमति देने का अनुरोध किया। आम चुनाव से ठीक पहले अयोध्या मामले में केंद्र सरकार के सुप्रीम कोर्ट जाने के फैसले को बीजेपी ने राम मंदिर निर्माण की दिशा में बड़ा कदम बताया है।

दरअसल, लोकसभा चुनाव में कुछ ही हफ्ते बचे हैं, इस बीच मंगलवार को केंद्र सरकार ने अयोध्या में गैर-विवादित भूमि उसके मूल मालिकों को लौटाने की पहल की। इसमें राम जन्मभूमि न्यास भी शामिल है। बीजेपी नेताओं ने मोदी सरकार के इस कदम को अयोध्या में भगवान राम का मंदिर बनने का काम शुरू होने से जोड़ा है। आपको बता दें कि 67 एकड़ के गैर-विवादित भूमि में से राम जन्मभूमि न्यास की जमीन 42 एकड़ है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा, सरकार जमीन को उसके मूल मालिकों को लौटाना चाहती है और वे वहां राम मंदिर बनाना चाहते हैं। उन्होंने आगे कहा कि बीजेपी हमेशा से कहती रही है कि कानूनी रास्ते से अयोध्या में राम मंदिर बनाया जाना चाहिए और सरकार का यह फैसला एक कानूनी कदम है। उन्होंने कहा, श्हम इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि कोर्ट से सरकार को जल्द से जल्द अनुमति मिल जाएगी। गौरतलब है कि बीजेपी ने अपने चुनावी घोषणा-पत्र में हमेशा अयोध्या में उस स्थान पर जहां बाबरी मस्जिद थी, राम मंदिर निर्माण की प्रतिबद्धता जताई है।

6 दिसंबर 1992 को ढांचे को गिरा दिया गया था। दरअसल, आम चुनाव से पहले पार्टी अब मानकर चल रही है कि उसे अपने कोर समर्थकों का वोट पाने के लिए मंदिर निर्माण की मंशा स्पष्ट करनी होगी। राजनीतिक जानकार 2004 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के हारने की एक बड़ी वजह भी इसे मानते हैं। नेता ने पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के हाल में बीजेपी अधिवेशन में दिए भाषण का जिक्र करते हुए कहा कि जब उन्होंने मंदिर निर्माण को लेकर पार्टी की प्रतिबद्धता दोहराई थी तो हजारों डेलिगेट्स ने जमकर तालियां बजाईं थीं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संक्षिप्त रूप से जिक्र किया था, जिस पर लोगों ने जोर-शोर से खुशी जाहिर की थी। कानून की मांग के बीच मोदी ने कहा था कि उनकी सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करेगी लेकिन सुनवाई में देरी से साधुओं और पार्टी के कोर हिंदुत्व समर्थकों में चिंता और भ्रम बढ़ रहा था। सरकार की याचिका के महत्व को स्पष्ट करते हुए पार्टी नेता ने कहा, श्हमें उनकी भावनाओं को लेकर चिंतित होना होगा। राम मंदिर चाहने वाले लोगों ने हमेशा हमें समर्थन दिया है।

सरकार की तरफ से यह राजनीतिक संदेश दिया जाना चाहिए कि हमें उनकी भावनाओं की परवाह है। उधर, बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि न्यास अयोध्या में राम मंदिर चाहता है।

गैर-विवादित भूमि के बड़े मालिकों में यह ट्रस्ट एक है, जिसकी जमीन सरकार ने अधिग्रहित की है और अब वापस करने की पेशकश की है। उन्होंने संकेत देते हुए कहा कि विवादित जगह के आसपास की बढ़ी हुई जमीन को उसके मूल मालिकों को लौटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में सरकार की याचिका से राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा।

वहीं, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है और उम्मीद भी जताई कि गैर-विवादित भूमि पर काम शुरू करने की अनुमति मिल जाएगी। जावड़ेकर ने स्पष्ट कहा कि सरकार चाहती है कि 0.313 एकड़ की जो विवादित जमीन है उस पर यथास्थिति बनी रहे, उसका कानूनी कामकाज और कोर्ट केस पूर्व की तरह चलता रहे।

इसके अलावा भूमि के जिस हिस्से पर कोई विवाद नहीं है, सरकार उसे ही मूल मालिकों को वापस देना चाहती है। उन्होंने कहा कि सरकार विवादित जमीन को नहीं छू रही है।

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