आज भी पुरुष नहीं करते स्पर्म की समस्या पर बात, देखे रिपोर्ट

लाइफ स्टाइल:- आज के समय मे कोई कितना भी स्मार्ट क्यों न हो उसे किसी चीज की ख्वाहिश हो या न हो लेकिन अपने परिवार की चाहत हर किसी को होती है और एक समय ऐसा आता है जब हम यह चाहते हैं कि हमारा एक बच्चा हो। लेकिन कई बार हमारी यह चाहत अधूरी रह जाती है। वही घर की महिलाएं बच्चा न होने पर पत्नी को दोष देने लगती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बच्चा न होने के लिए पुरष भी जिम्मेदार है। 

असल मे आज के समय मे बच्चा पैदा करने के लिए पुरुष को कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उनकी यह समस्याएं कम होने की जगह बढ़ती ही जा रही है। वही इस समस्या का कारण जानने के लिए भारत और जर्मनी के फर्टिलिटी एक्सपर्ट की एक टीम ने स्पर्म क्वॉलिटी और इजैक्‍युलेशन(स्पर्म का निकलना) के बीच के संबंध के बारे में जानने की कोशिश की है। 
कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज, MAHE-मणिपाल और जर्मनी की यूनिवर्सिटी ऑफ म्यूएनस्टर के रिसर्चर्स ने इजैक्‍युलेशन की लेंथ और इससे स्पर्म पर पड़ने वाले इसके असर को जानने की कोशिश की है। इस स्टडी के लिए, 10 हजार पुरुषों के दो इजैक्‍युलेशन के बीच के गैप और स्पर्म क्वॉलिटी को आंका गया. इसके नतीजे में पाया गया कि अगर आप प्रेग्नेंसी के लिए ट्राई कर रहे हैं तो स्पर्म की अच्छी क्वॉलिटी के लिए औसत गुणवत्ता के स्पर्म वाले पुरुषों को दो इजैक्‍युलेशन के बीच दो दिनों का गैप जरूर रखना चाहिए। वहीं दूसरी तरफ, जिन लोगों की स्पर्म क्वॉलिटी काफी ज्यादा खराब है, उन्हें इसे बेहतर बनाने के लिए दो इजैक्‍युलेशन के बीच 6 से 15 दिनों का गैप रखना चाहिए। 
वही अगर हम बात भारत की करे तो यहाँ 50 फीसदीं पुरुष ऐसे हैं जिनके स्पर्म की क्वालिटी अच्छी नहीं है। लेकिन वह इसपर बात करने से झिझकते रहते हैं। यहाँ पुरुषों में फर्टिलिटी की समस्या पर आज भी खुलकर बात नहीं होता है और इसे अनदेखा किया जाता है. यही वजह है कि कई बार इसका ना तो पता चलता है और ना ही इलाज होता है।

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